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Ramcharitmanas: राम नाम से जीवन पथ तक, रामचरितमानस में छिपा संपूर्ण जीवन-दर्शन

Published: Sat, 24 Jan 2026 11:18 AM (GMT+05:30)

सिवान के हरपुर में आचार्य सोम शुक्ला ने रामकथा के दौरान रामचरितमानस को केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-दर्शन ...और पढ़ें

रामचरितमानस में छिपा संपूर्ण जीवन-दर्शन

रामचरितमानस में छिपा संपूर्ण जीवन-दर्शन

HighLights

  1. रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, संपूर्ण जीवन-दर्शन है।

  2. इसका नाम शिव के मन में राम नाम के वास से जुड़ा।

  3. सात कांड मानव जीवन के सात चरणों का प्रतीक हैं।

संवादसूत्र, रघुनाथपुर (सिवान)। गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाली संपूर्ण जीवन-दृष्टि है। यह विचार रघुनाथपुर प्रखंड के हरपुर गांव में आयोजित तीन दिवसीय रामकथा के पहले दिन शुक्रवार की रात प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य सोम शुक्ला ने व्यक्त किया।

रामचरितमानस के नाम में छिपा गूढ़ आध्यात्मिक भाव

आचार्य सोम शुक्ला ने कहा कि रामचरितमानस नाम अपने आप में गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समेटे हुए है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव सदा अपने मन में श्रीराम नाम का स्मरण करते हैं। ‘मानस’ का अर्थ मन होता है, और जब शिव के मानस में राम नाम का वास है, तभी इस महान ग्रंथ का नाम रामचरितमानस पड़ा।

घर में रामचरितमानस का वास, सकारात्मक ऊर्जा का संचार

उन्होंने बताया कि रामचरितमानस का पाठ करना और इसे घर में रखना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे घर-परिवार में शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बनता है। संकट के समय यह ग्रंथ मन को धैर्य और आत्मबल प्रदान करता है।

सात कांड, मानव जीवन के सात चरणों का प्रतीक

आचार्य शुक्ला ने बताया कि रामचरितमानस सात सोपानों—बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड—में विभाजित है। ये सातों कांड मानव जीवन के सात चरणों का प्रतीक हैं, जिनमें जन्म से लेकर मोक्ष तक का मार्ग समाहित है।

जीवन में उतारें रामचरितमानस के आदर्श

उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति इन सातों कांडों में वर्णित आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले, तो जीवन-पथ पर कभी भटकाव नहीं होता। सत्य, मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और करुणा जैसे मूल्य आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं।

आज भी उतनी ही प्रासंगिक है रामकथा

आचार्य सोम शुक्ला ने कहा कि रामचरितमानस आज के भौतिक और तनावपूर्ण युग में भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी अपने रचना काल में थी। यह ग्रंथ व्यक्ति को संयमित जीवन जीने और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा देता है।

सरस्वती पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजन

कार्यक्रम का आयोजन सरस्वती पूजा समिति के तत्वावधान में किया गया। आयोजन में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही और रामकथा का रसपान किया।

मौके पर समिति के संस्थापक कन्हैया गिरी, राजेश गिरी, हरेश गिरी, शिवजी भगत, विकास गुप्ता, नरेन्द्र मांझी, विनोद सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग और श्रद्धालु मौजूद रहे।