सिवान : जल संचय को लेकर सरकार कुआं, तालाब, नदी आदि का जीर्णोद्धार करा रही है, लेकिन लोग बेपरवाह बने हुए हैं और नदी, कुआं व तालाबों का अतिक्रमण कर इसका अस्तित्व मिटाने पर लगे हुए हैं। प्रखंड का खोरीपाकर का ऐतिहासिक तालाब अतिक्रमण की चपेट में आकर सिमटता जा रहा है। दशकों पूर्व ग्रामीण इस तालाब में स्नान करने के साथ पशुओं को पानी पिलाने, खेतों की सिचाई करने के काम में लाते थे। यहां छठ व्रती भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य देते हैं। इस तालाब का महत्व यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आगमन से और बढ़ जाता है। बताया जाता है कि 1926 में चंपारण से नमक सत्याग्रह आंदोलन के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साथ राजेंद्र बाबू खोरीपाकर बाजार में आए थे, जहां तत्कालीन जमींदार कपिलदेव सिंह द्वारा अस्थायी शिविर का निर्माण कराया गया था। वहीं तिरंगा फहराकर राष्ट्र गीत गाया गया था तथा सैकड़ों लोगों कांग्रेस की सदस्यता ली थी। बापू और बाबू इसी तालाब में स्नान किए थे। वहीं जमींदार कपिलदेव बाबू ने बापू के आगमन पर सांप्रदायिक सौहार्द के लिए छह बीघा जमीन मदरसे के लिए मुस्लिम भाइयों को दान में दिया था। ब्रिटिश कालीन इस पोखरे की अपनी अलग पहचान है, लेकिन प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण इस तालाब का अस्तित्व मिटता जा रहा है। इस तालाब के उत्तर के बांध को काट कर ग्रामीण चापाकल, भुसौल रख मवेशियों को बांधने का काम करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तालाब के जीर्णोद्धार का प्रयास नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसेंगे। एक वर्ष पूर्व सीओ सुनील कुमार ने यहां से अतिक्रमण हटाया था लेकिन बाद में फिर ग्रामीण इसका अतिक्रमण कर लिया गया। वहीं तालाब की साफ-सफाई नहीं होने से यह तालाब अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। मुखिया मुकेश कुमार सुमन द्वारा इस तालाब के जीर्णोद्धार के लिए काफी काम कराया गया है। वहीं सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल द्वारा एक सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया है। इस संबंध में पूछे जाने पर सीओ सुनील कुमार ने बताया कि शीघ्र ही इसकी जांच कराकर पुन: तालाब से अतिक्रमण हटाया जाएगा।