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सिवान में नगर निकायों का बदलेगा स्वरूप, दारौंदा की सिरसांव और बगौरा बनेंगी नगर पंचायत

Published: Thu, 08 Oct 2026 03:18 PM (GMT+05:30)

सिवान जिले में नगर निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें दारौंदा की सिरसांव और बगौरा पंचायतों को नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. दारौंदा की सिरसांव, बगौरा पंचायतें नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव।

  2. महाराजगंज नगर निकाय में कुछ पंचायतें शामिल होंगी।

  3. विलय, सीमा विस्तार, उत्क्रमण जैसे चार विकल्पों पर विचार।

संवाद सूत्र, दारौंदा (सिवान)। तेजी से बदलते शहरी स्वरूप के बीच जिले में नगर निकायों का नक्शा भी बदलने की तैयारी शुरू हो गई है।

नए नगर निकाय के गठन से लेकर पुराने निकायों के उत्क्रमण, सीमा विस्तार और दो या अधिक निकायों के विलय तक के प्रस्ताव मांगे गए हैं।

दारौंदा प्रखंड मुख्यालय स्थित सिरसांव पंचायत तथा बगौरा पंचायत को नगर पंचायत बनाने के साथ ही बालबंगरा, कौथुआसारंगपुर और रुकुंदीपुर पंचायत के कुछ हिस्सों को महाराजगंज नगर निकाय में शामिल करने का प्रस्ताव भेजने की तैयारी शुरू हो गई है।

जिला पदाधिकारी विजय प्रकाश मीणा ने बीडीओ को अंचलाधिकारी, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी के साथ समन्वय कर प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है।

प्रस्ताव जिला नगर विकास एवं प्रबंधन शाखा के माध्यम से जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के स्तर पर समीक्षा और अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे।

चार विकल्पों से तय होगा नया शहरी स्वरूप

नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश पर विलय, सीमा विस्तार, उत्क्रमण और नए नगर निकाय का गठन—इन चार विकल्पों पर प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।

तेजी से विकसित हो रहे बाजारों और शहरी सुविधाओं वाले ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निकाय के दायरे में लाने की संभावना भी जांची जाएगी। पात्रता पूरी होने पर नगर पंचायत को नगर परिषद और बड़े नगर परिषद को नगर निगम में उत्क्रमित करने पर भी विचार किया जा सकता है।

गूगल मैप बताएगा प्रस्तावित सीमा

प्रस्ताव के साथ ए-0 आकार के कागज पर गूगल मैप भी देना होगा। इसमें प्रस्तावित क्षेत्र की सीमा, मकानों व अन्य संरचनाओं की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

सीमा विस्तार या उत्क्रमण के मामले में पुराने और नए क्षेत्र को अलग-अलग दर्शाना होगा। शामिल होने वाली ग्राम पंचायत, राजस्व ग्राम, वार्ड और थाना संख्या का पूरा विवरण भी देना अनिवार्य होगा।

2011 की जनगणना से परखी जाएगी पात्रता

नगर निकाय की पात्रता तय करने में 2011 की प्रकाशित जनगणना के आंकड़े अहम होंगे। प्रावधानों के अनुसार नगर पंचायत के लिए 12 हजार से 40 हजार, नगर परिषद के लिए 40 हजार से दो लाख तथा नगर निगम के लिए दो लाख या उससे अधिक आबादी के मानक देखे जाएंगे। क्षेत्रफल, जनसंख्या घनत्व, चौहद्दी और सीमाओं का भी प्रस्ताव में स्पष्ट उल्लेख करना होगा।

आय-व्यय से लेकर आत्मनिर्भरता तक का हिसाब

बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा छह के तहत निर्धारित प्रपत्र में करीब 18 प्रकार की सूचनाएं देनी होंगी। इसमें नाम, शामिल गांव, क्षेत्रफल, चौहद्दी, जनसंख्या, घनत्व, कर्मियों और कृषि कर्मियों की संख्या के साथ नगर निकाय गठन का औचित्य भी बताना होगा।

इसके अलावा आय के स्रोत, संभावित आवर्ती-अनावर्ती खर्च और प्रारंभिक खर्च के लिए उपलब्ध राशि का ब्योरा देना होगा।

जनगणना के बीच फिर खुला निकाय गठन का रास्ता

नगर निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया ऐसे समय शुरू हुई है, जब जनगणना-2027 को लेकर प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक लागू है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अधिसूचना के अनुसार 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक निर्धारित है।

इसी वजह से पहले नगर निकाय गठन और सीमा विस्तार से जुड़े प्रस्तावों को जनगणना के बाद तक टालने की बात थी। अब सरकार ने जनगणना अवधि में भी नगर निकायों के विलय, विस्तार, उत्क्रमण और नए गठन से संबंधित प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।

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