सीतामढ़ी। टीकाकरण को सरकारी कार्यक्रम हीं नहीं समझे, बल्कि इसे सामाजिक उत्तरदायित्व समझकर इस अभियान को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी अदा करे। उक्त बातें डीएम डॉ. रणजीत कुमार ¨सह ने समाहरणालय स्थित विमर्श कक्ष में शनिवार को आयोजित जिले के सभी मदरसों के शिक्षकों की खसरा-रूबेला टीकाकरण को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला में कही। डीएम ने कहा कि हमारा नैतिक दायित्व है कि 0 से लेकर 15 वर्ष के सभी बच्चों को टीका दिलवाए। उन्होंने कहा कि वैसे बच्चे जो किसी कारणवश स्कूल या मदरसा नही जा पाते है, उन्हें भी चिन्हित कर खसरा और रूबेला का टीका अनिवार्य रूप से दिलवाए। उन्होंने कहा कि मदरसों व स्कूलों में एक शिक्षक के रूप में टीकाकरण के प्रति सकरात्मक तथा उत्साह का माहौल बनाने में आपकी भूमिका अहम है। उन्होंने मदरसा शिक्षकों को सभी बच्चों और उनके अभिभावकों को टीकाकरण की सूचना देने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि अगर किसी को टीकाकरण के संबंध में भ्रांति हो तो अविलम्ब उसे दूर करे। सिविल सर्जन डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 15 जनवरी से खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है। इसके तहत जिले के 13 लाख बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित है। 200 बच्चों पर एक टीम का गठन होगा। 0 से लेकर 15 साल के सभी बच्चों को टीका देना अनिवार्य है। जो पहले टीका ले चुके है उन्हें भी अनिवार्य रूप से टीका लेना है। यह बिल्कुल सुरक्षित टीका है। सिविल सर्जन ने बताया कि पिछले साल खसरा के 850 केस जिले में सामने आए थे। उन्होंने कहा कि इस टीकाकरण से बच्चों को खसरा एवम रूबेला से बचाया जा सकता है। जबकि जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. केडी पूर्वे ने पावर पॉइन्ट प्रजेंटेशन के माध्यम से इस पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसकी जानकारी डीपीआरओ परिमल कुमार ने दी है।

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