सीतामढ़ी। जिला जेल में क्षमता से तिगुना अधिक बंदी हैं। इसके चलते जेल की व्यवस्था चरमरा गई है। बंदियों को बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हो रहीं। इससे उनमें आक्रोश है। वहीं, जेल प्रशासन भी परेशान है। वह जेल मुख्यालय को लगातार पत्र भेजकर इसकी जानकारी दे रहा है, लेकिन क्षमता बढ़ाने की पहल नहीं की जा रही।

सीतामढ़ी जेल की क्षमता 286 की है, लेकिन अभी 35 महिला समेत 1080 बंदी हैं। संख्या लगातार बढ़ भी रही है। यहां बैरक के अलावा शौचालय और स्नानागार की संख्या काफी कम है। पिछले डेढ़ दशक से यही स्थिति है। जेल प्रशासन कुछ सजायाफ्ता और खूंखार बंदियों को दूसरी जेल भेज देता है, लेकिन इसका असर क्षमता पर नहीं पड़ता।

पिछले दो साल में शराबबंदी के तहत बड़ी संख्या में लोग पकड़ कर जेल भेजे जा रहे हैं। इसका असर भी जेल की सेहत पर पड़ रहा है। पूर्व में सुविधाओं को लेकर कई बार बंदियों ने जेल में आंदोलन भी किया। कुछ बंदियों ने पेशी के दौरान कोर्ट में न्यायिक पदाधिकारियों को आवेदन देकर समस्याओं के समाधान की गुहार भी लगाई थी। लेकिन, हुआ कुछ नहीं।

हरसंभव सुविधा मुहैया करा रहे : जेल अधीक्षक राजेश कुमार राय का कहना है कि बंदियों को कोई परेशानी नहीं है। सीमित संसाधनों के बीच बंदियों को हरसंभव सुविधा मुहैया कराई जा रही है। उनके लिए जेल में इग्नू सेंटर खोला जा रहा, जहां उन्हें शिक्षित किया जाएगा। महिला बंदियों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया है। समय-समय पर बंदियों को योग की जानकारी दी जाती है। कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण की तैयारी है।

इनसेट

खता मां की, सजा झेल रहे मासूम

जेल में आधा दर्जन ऐसी मां हैं, जिनकी खता की सजा उनके बच्चे भी झेल रहे हैं। यहां सात मासूम अपनी मां के साथ बंद हैं। इनकी कोई खता नहीं, लेकिन कम उम्र के चलते उन्हें मां के साथ रखा गया है ताकि उनका प्यार मिल सके।

Posted By: Jagran