सीतामढ़ी। गर्मी की तपिश के बावजूद रमजान को ले नन्हें रोजेदारों में उत्साह परवान पर है। नन्हें रोजेदार दानिश अशरफ बताते हैं कि कदर की रात अल्लाह के हुक्म से फरिश्ते सारी रात सलामती और खैर

बांटते रहते हैं।

अयाना खां ने कहा कि रमजान में नेकी करते हुए अपने आस पड़ोस के लोगों व गरीबों की बेहतर सेवा करनी चाहिए। उमर एकराम ने कहा कि रमजान के दौरान रोजेदारों को बुरी सोहबतों से दूर रहना चाहिए। अलीना बशीर बताती हैं कि रमजान बरकत वाला महीना है। इसमें अल्लाह से दुआ करनी चाहिए। मौलाना अब्दुर रब मसजिदे तकवा मेहसौल ने कहा कि रमजान आया तो पैगमबर मुहम्मद साहब ने फरमाया कि यह महीना जो तुम पर आया है उसमें एक ऐसी रात हैं जो हजारों

महीनो से बेहतर है। जो बंदा इससे महरूम रहा वह हर नेकी से महरूम रहा। इस रात की सआदत से सिर्फ बदनसीब ही महरूम होते हैं। इस रात को लैलतुल कदर कहते हैं। लैलतुल कदर रमजान मुबारक की आखरी दस ताक रातों में से एक निहायत बाबरकत

रात है। जिसे सबे कदर यानी कदर और बरकत वाली रात कहते हैं।

कुरान मजीद में भी इस रात का बयान सुरह कदर में तफसील से किया गया है। इसमें अल्लाह फरमाता है कि बेशक हमने कुरान को कदर की रात मे नाजिल किया है। कदर की रात हजार महीनो से बेहतर है। इस रात मे अल्लाह के हुक्म से फरिशते सारी रात सलामती और खैर बांटते रहते है। हजरत आयशा सिदिदका हजरत अब्दुल्लाह बिन अब्बास की रवायत है कि सबे कदर रमजान मुबारक के

आखिरी दस दिनों में से कोई रात है।

इसमें इबादात ऐतकाफ नफील व तहज्जुद की नमाज पढ़ना कुरान की

तिलावत मखसुस दुआ मॉगना वगैरह है । जो लैलतुल कदर में पूरे

जज्बे और यकीन से इबादत करें और अल्लाह से दुआ करें, उसके सारे गुनाह माफ फरमाता है ।

Posted By: Jagran

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