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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 02, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मढि़या धाम स्थित मानकेश्वर नाथ महादेव की महिमा अपरंपार

By JagranEdited By:
Published: Thu, 02 Aug 2018 11:52 PM (IST)

नेपाल से सटे सोनबरसा प्रखंड के मढि़या गांव में है बाबा मनकेश्वर नाथ महादेव का अति प्राचीन मंदिर।

मढि़या धाम स्थित मानकेश्वर नाथ महादेव की महिमा अपरंपार
मढि़या धाम स्थित मानकेश्वर नाथ महादेव की महिमा अपरंपार

सीतामढ़ी। नेपाल से सटे सोनबरसा प्रखंड के मढि़या गांव में है बाबा मनकेश्वर नाथ महादेव का अति प्राचीन मंदिर। श्रद्धालुओं द्वारा मांगी गई हर मुराद बाबा मानकेश्वर पूरी करते हैं। अधवारा व झीम नदी के तट पर स्थापित इस मंदिर में सदियों से रविवार के दिन जलाभिषेक करने की परंपरा है। वैसे तो आस पास के क्षेत्र और सीमावर्ती नेपाल के गांवों को लोगों का यहां सालों भर दर्शन और जलाभिषेक होती रहती है लेकिन सावन के माह और शिवरात्री के अवसर पर यहां श्रद्धालुओ की अपार भीड़ जमी रहती है।

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इतिहास

मान्यताओं के अनुसार यहां सदियों पूर्व शिव¨लग का धरती के गर्भ से उत्पति हुई थी। इसका उदभव त्रेता युग में श्रीराम के जन्म से पहले की बताई जाती है। ¨कवदंती के अनुसार इस शिव¨लग पर सर्वप्रथम मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार ने मंदिर बनवाया था। इसके साक्ष्य भी हैं। मंदिर से पूरब करीब एक किलोमीटर की दूरी पर झीम और अधवार नदी का संगम है। जहां श्रवण कुमार के माता पिता के नाम पर अंधा-अंधी मठ है। वहीं मंदिर से पश्चिम एक किलोमीटर की दूरी पर श्रवण कुमार का अखाड़ा है।श्रवण कुमार का इस मंदिर और बाबा मानकेश्वर नाथ के प्रति अपार श्रद्धा थी।

विशेषता

ऐसी मान्यता है कि बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता है। सच्चे दिल और आस्था से यहां मांगी गई सभी मनोकामना बाबा मानकेश्वर नाथ पूरी करते हैं। यहां की विशेष परंपरा बैगन का भार चढ़ाना है। यहां सोमवार के स्थान पर रविवार को ही जलाभिषेक की परंपरा अनंत काल से चली आ रही है।

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सावन में तैयार है मंदिर

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मंदिर भगवान शिव के श्रद्धालुओं के लिए तैयार है। मंदिर के रंगरोगन के साथ ही आस पास का ईलाका साफ सुथरा किया गया है। यहां मंदिर के आस पास विशेष मेला लगाया जाता है। यहां के मंदिर और मेला का संचालन स्थानीय निवासी तत्परता से करते हैं। सभी के दिलों में बाबा के प्रति अपार श्रद्धा है। सुरक्षा के साथ ही श्रद्धालु के प्रति सहयोग की भावना से यहां के लोग सावन के माह में सराबोर हो जाते है। सभी श्रद्धालुओं के स्वागत में दिन रात लगे देखे जाते हैं।

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कहते हैं पुजारी

यहां रविवार के दिन ही सावन के माह में पूर्वकाल से ही जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है। यहां मन्नत के लिए लोग बैगन का भार चढ़ाते है जो कि श्रवण कुमार से जोड़ कर देखा जाता है। श्रवण कुमार ही बाबा के सबसे प्रिय भक्त रहे हैं। यहां के बाबा मानकेश्वर नाथ की महिमा से लोगों के दिलों में अपार श्रद्धा रहती है। यहां आने वाला कोई भी खाली हाथ नहीं जाता। यहां लोग परेशान और हतोत्साहित अवस्था में आते हैं और बाबा की महिमा से मुसकराते हुए जाते है : लक्ष्मण गिरी, पुजारी, मढि़या धाम।

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कहते हैं लोग

सावन के महिने में यहां दिन रात श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। चारो तरफ हर हर महादेव की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहता है। यहां के लाग सदैव ही श्रद्धालु भक्तों के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाते है और मंदिर के लेकर श्रद्धालुओं की सेवा में कोई कोताही नहीं बरतते हैं :- वीरेंद्र कुमार, मढि़या निवासी।