सीतामढ़ी। दैनिक जागरण का संपादकीय महा अभियान 'जो उपजाए अन्न वो क्यों न हो संपन्न' के तहत शुक्रवार को किसान जागरूकता रथ चोरौत प्रखंड में पहुंचा। आंबेडकर चौक पर किसानों ने इसका उत्साह के साथ स्वागत किया। इसके बाद जागरूकता रथ प्रखंड के यदुपट्टी पहुंचा। जहां दुर्गा दामोदर चौक स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें किसानों ने खेती से संबंधित समस्याएं गिनाई। किसानों ने कहा सरकार द्वारा किसानों के हित में अनेक लाभकारी योजना चलाई जा रही है, लेकिन वे योजना किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे किसानों को खेती करने में असुविधा हो रही है। डीजल अनुदान, बीज वितरण तथा सब्सिडी पर खाद आदि सरकार द्वारा किसानों को दी जाती है, लेकिन विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं होते हैं। परिणाम है कि किसानों को यह सुविधा उस वक्त नहीं मिल पाती है, जिस वक्त इसकी सख्त जरूरत होती है। समय पर क्रय केंद्र नहीं खुलने से किसान विचौलियों के हाथ समर्थन मूल्य से कम कीमत पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होते हैं। ऐसे में किसान अपने परिवार का भरण-पोषण करें या कर्ज को चुकाएं। हालात बाद से बदतर हो जाती है। किसान थक हार कर खेती से मुंह मोड़ने लगते हैं। योजनाओं के लाभ की खातिर सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है। किसानों को सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं की या तो जानकारी नहीं होती, जानकारी होने पर भी सुविधाओं को लेने के लिए इतना दौड़ाया जाता है कि किसान थक हार कर बैठ जाते हैं। किसान कार्यशाला में बीएओ शंभू पासवान ने कम लागत में अधिक उपज, वैज्ञानिक तरीके से खेती के तरीके, मिट्टी जांच, वर्मी कम्पोस्ट से खेती करने सहित अन्य जानकारी किसानों को दी। कहा कि किसानों को बीज विस्तार पर अनुदान, जीरो टिलेज पर शत-प्रतिशत अनुदान, रोटावेटर पर अनुदान के साथ 70 मीटर की गहराई पर गाड़ने में पन्द्रह हजार का अनुदान व उससे अधिक गहराई के बो¨रग में 35 हजार तक अनुदान की जानकारी दी। वहीं, किसानों से जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन कराने का आग्रह किया। कहा कि गेहूं की बुवाई से लेकर अन्य फसलों में भी रजिस्टर्ड किसानों को ही प्रति लीटर पचास रुपये का अनुदान मिलेगा। बताया कि विद्युत विभाग द्वारा जल्द से जल्द किसानों के बो¨रग तक बिजली पहुंचाकर बिजली से पटवन की व्यवस्था कराई जा रही है इससे किसान ¨सचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। बीएओ पासवान ने कहा कि किसान लगातार कृषि में क्रांति लाने को लेकर मेहनत कर रहे हैं। इसमें कोशिश यह रहती है कि आमदनी बढ़े। ज्यादातर अन्नदाता किसान अपना समाधान खुद करते हैं। तब जाकर खेतों में फसल लहलहाती है। मौके पर संजीव कुमार, संजीव मिश्र, कैलाश पासवान, अनिल पूर्वे, पंकज कुमार ने किसानों को कई महत्वपुर्ण जानकारी दी। मौके पर किसान विन्देश्वर झा, मनोज ठाकुर, राम¨सहासन ठाकुर, मनोज कुमार मिश्र, हरिशंकर चौधरी, राकेश कुमार शर्मा, दिलीप कुमार चौधरी, विमलेश कुमार मिश्र, रामाक्षय चौधरी, कौशल चौधरी, लालबाबू झा, रंजेश कुमार ठाकुर, रामविवेक चौधरी, धीरज कुमार चौधरी, रामानंद ठाकुर, सोगारथ झा, संजय कुमार चौधरी, लालबाबू ठाकुर, कारीमंडल, हरिवल्लव झा, राजू मंडल, अमरेश चौधरी, विक्रम कुमार मिश्र, संदेश चौधरी, अर¨वद कुमार झा, शंभू कुमार मिश्रा, रामविराजी चौधरी, शत्रुध्न चौधरी सहित कई किसान मौजूद थे। क्या कहते हैं किसान :

किसान के लिए जल प्रबंधन का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए। हर खेत तक पानी पहुंचाने की सुविधा मिलनी चाहिए। इससे किसान सुखाड़ की समस्या से मुक्त हो सके। समय पर बारिश की ¨चता से किसानों को मुक्ति मिल सके। सरकार की सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने से व्यवस्था में बदलाव लाया जा सकता है ।

-- संजय कुमार चौधरी, किसान सरकार द्वारा समय पर खाद बीज के मिलने से कृषि बेहतर होगा और अनाज उत्पादन में वृद्धि होगी तभी उनकी आमदनी बढ़ेगी। अभी ऐसी स्थिति है कि किसान कर्ज लेकर खेती करता है, लेकिन उसका सही मूल्य नहीं निकलता है। वह कर्ज के बोझ से दबा रहता है।

-- मुकेश झा, किसान सरकार द्वारा मिलने वाला लाभ को किसानों तक सीधे पहुंचने से ही फायदा होगा। धान-गेहूं के अलावा किसान नकदी फसल भी करेगा। जंगली जानवरों के उत्पात से किसान त्रस्त रहते हैं। जानवर रात में फसल को बर्बाद कर देता है। इसके प्रबंधन के लिए विभाग की ओर से आवश्यक कदम उठाए जाना चाहिए।

-- रामकृपाल झा, किसान वर्तमान में इन क्षेत्रों में ¨सचाई की सुविधा नहीं है। नेपाल से आने वाली रातो नदी के कहर से हर साल फसल बर्बाद होती है। नदी किनारे बांध बनाकर सुईलिस गेट बना ¨सचाई की व्यवस्था कराने से ¨सचाई की समस्या दूर होगी। निचले इलाके वाले खेत में धान की फसल नहीं होती है।

--- बंकर चौधरी, किसान आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं रहने से खेती में परेशानी होती है। ¨सचाई, मजदूरी व जुताई भी काफी महंगी हो गई है। पंप सेट से ¨सचाई करना पड़ता है जो काफी महंगा होता है। लागत के अनुरूप अनाज की कीमत नहीं मिलने से किसान त्रस्त है।

-- भविछन मंडल, किसान

Posted By: Jagran