सीतामढ़ी। महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक तीज और चौठी चांद का पर्व बुधवार को पूरे जिले में मनाया जाएगा। पर्व को लेकर गांव से शहर तक उत्साह का माहौल है। मंगलवार से ही इलाका भक्ति में डूब गया। मंगल गीत गूंजने लगे। बाजारों में ग्राहकों की भीड़ रही इसके चलते शहर में जाम की स्थिति रही। पति की लंबी उम्र के लिए किए जाने वाले तीज और चौठी चांद व्रत एक ही दिन पड़ने के कारण पर्व का उत्साह दोगुना हो गया है। वहीं बाजार पर महंगाई का रंग छा गया है।

¨हदू धर्म में मनाए जाने वाले पर्व में तीज भी प्रमुख है। भद्र मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व गणेश चतुर्थी के एक दिन पहले मनाया जाता है। हालांकि, इस बार दोनों पर्व एक ही दिन है। तीज भी सुहागिनों का व्रत होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और भगवान शिव और पार्वती से सदा सुहागन का आर्शीवाद मांगती हैं। महिलाएं इस व्रत को निराहार और निर्जला रखती है।

शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार हरतारिलका व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने देवाधिदेवमहादेव भोले बाबा को प्राप्त करने के लिए किया था। तब से कुंवारी कन्याएं भी योग्य वर प्राप्ति की कामना से इस व्रत को करती है। शुभ मुहूर्त एवं विधविधान

पंडित गिरधर गोपाल चौबे के अनुसार हरतालिका तीज की पूजा के लिए

प्रात:काल का शुभ मुहूर्त अहले सुबह से दोपहर 2 बजे तक फिर 2 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम 6: 54 तक है। तृतीय तिथि बुधवार शाम 6 बजकर 38 मिनट तक ही रहेगा। इसलिए इसके पूर्व ही पूजा करना अच्छा होगा। जबकि चौठी चांद पर्व के तहत शाम 6.38 के बाद पूजन किया जाएगा। बताते चलें कि तीज का व्रत प्रदोषकाल में किया जाता है। सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है।

पूजन सामग्रियां पर महंगाई की मार

तीज को लेकर पूजन सामग्री पर मंहगाई का बादल छाया रहा। बाजार में उपलब्ध पूजन सामग्री अन्य दिनों की अपेक्षा तीन से चार गुणा अधिक मूल्य पर बिकी। खीरा 70 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम। इसी प्रकार केला 30 रुपये प्रति दर्जन, मकई का बाल 10 रुपये जोड़ा, बांस का डलवा 15 से 25 रुपये प्रति, नींबू 5 रुपये पीस, सेव 80 से 100 रुपये प्रति किग्रा, सामा का सत्तू 5 से 10 रुपये पुड़िया, नासपाती 100 रुपये किग्रा, मिट्टी का कोहिया 5 से 20 रुपये पीस बिका।

दूध की रही किल्लत

व्रत को लेकर दूध की मांग बढ़ने से किल्लत देखी गई। इसके लिए व्रतियों ने एक दिन पहले आवश्यकता के अनुसार दूध की बु¨कग कराई थी। सुधा की दुकानों पर दूध के लिए ग्राहकों की भीड़ देखी गई।

व्रत के नियम

-- हरतालिका तीज व्रत में जल ग्रहण नहीं किया जाता है। व्रत के बाद अगले दिन जल ग्रहण करने का विधान है।

-- हरतालिका तीज व्रत को एक बार करने पर फिर इसे छोड़ा नहीं जाता है। प्रत्येक वर्ष इस व्रत को विधि-विधान से करना चाहिए।

-- हरतालिका तीज व्रत के दिन रात्रि जागरण करते हुए भजन-कीर्तन करना चाहिए ।

-- हर तालिका तीज व्रत कुंवारी कन्याएं, सौभाग्यवती स्त्रियां करती हैं ।

बोली महिलाएं ::

सुधा श्रीवास्तव : तीज अखंड सौभाग्य का व्रत है। इस व्रत में महिलाएं बिना कुछ खाए-पीए रहती हैं। इस व्रत में पूजन रात भर किया जाता है। पूजन में बालू के भगवान शंकर एवं माता पार्वती का मूर्ति बनाकर किया जाता है। एक चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिव¨लग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती व उनकी सहेली की प्रतिमा बनाई जाती है।

सोनू श्रीवास्तव : यह एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस पर्व में पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। मिट्टी की प्रतिमाओं का निर्माण कर पुरोहित से कथा सुनती हैं। व्रती पूजन-पाठ के बाद रात भर भजन-कीर्तन करती हैं और हर प्रहर को इनकी पूजा करते हुए बिल्व-पत्र, आम के पत्ते, चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण करती हैं। स्नेहा : तीज का पर्व मिथिला में सौभाग्य का प्रतीक है। यहां तीज व्रत की परम्परा की पहचान कुछ अलग है। यह पर्व पति-पत्नी के संबंधों को मजबूत करता है। काफी कठिन तप के समान यह पर्व है। जिसे महिलाएं अपनी पति के लिए करती है। नीतू : तीज का पर्व हमारी संस्कृति व परम्परा का प्रतीक है। इससे हमारी आस्था जुड़ी है। इस पर्व में भगवान शिव व माता पार्वती की पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है।

Posted By: Jagran