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सीतामढ़ी में अब AI बताएगा पढ़ाने के नए तरीके, बाजपट्टी में 79 मास्टर प्रशिक्षित

Published: Tue, 18 Aug 2026 10:36 PM (IST)

सीतामढ़ी के बाजपट्टी में 79 मास्टर प्रशिक्षकों को 'शिक्षा में एआई' कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया गया। यह प्रशिक्षण शिक्षकों ...और पढ़ें

शिक्षकों को एआई का प्रशिक्षण देते प्रशिक्षक। सौ. शिक्षा विभाग

शिक्षकों को एआई का प्रशिक्षण देते प्रशिक्षक। सौ. शिक्षा विभाग

HighLights

  1. बाजपट्टी में 79 मास्टर प्रशिक्षकों को एआई का प्रशिक्षण मिला।

  2. एआई पाठ योजना, शिक्षण सामग्री बनाने में सहायक होगा।

  3. शिक्षकों को एआई के सुरक्षित, जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया गया।

जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। कक्षा में अब पाठ पढ़ाने का तरीका और भी तकनीकी होने वाला है। किताब और ब्लैकबोर्ड के साथ एआई शिक्षकों का नया मददगार बनेगा। पाठ योजना तैयार करने, शिक्षण सामग्री बनाने और विद्यार्थियों के मूल्यांकन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद ली जा सकेगी। बाजपट्टी में आयोजित प्रशिक्षण में 79 मास्टर प्रशिक्षकों को एआई के ऐसे ही व्यावहारिक इस्तेमाल से रूबरू कराया गया।

79 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण

सरस्वती विद्या निकेतन एवं 2 एसआरपीएन उच्च विद्यालय में आयोजित ‘शिक्षा में एआई’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का मंगलवार को समापन हुआ। इसमें 79 मास्टर प्रशिक्षकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनरेटिव एआई और माइक्रोसाफ्ट कोपायलट के प्रभावी, सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल की जानकारी दी गई।

पाठ योजना बनाने में मिलेगी मदद

प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि एआई की मदद से शिक्षक कम समय में पाठ योजना और शिक्षण सामग्री तैयार कर सकते हैं। विद्यार्थियों के मूल्यांकन में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। छात्रों की अलग-अलग जरूरतों के अनुसार शिक्षण को बेहतर बनाने में एआई मददगार साबित हो सकती है।

सात तत्वों से सीखें प्रभावी निर्देश

मुख्य प्रशिक्षक प्रमोद कुमार, कंप्यूटर विज्ञान शिक्षक, 2 एसआरपीएन उच्च विद्यालय ने प्रस्तुतियों, समूह चर्चा और व्यावहारिक अभ्यास के जरिए एआई के शैक्षणिक उपयोग को समझाया। प्रशिक्षण में एआई की मूल अवधारणा, पारंपरिक एवं जनरेटिव एआई, प्रभावी निर्देश तैयार करने के सात प्रमुख तत्व और शिक्षण सहायक के रूप में एआई जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

साइबर सुरक्षा पर भी जोर

शिक्षकों को एआई के साथ साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग की जानकारी भी दी गई। उन्हें बताया गया कि एआई से मिली जानकारी को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय उसका मानवीय स्तर पर सत्यापन जरूरी है। तकनीक के इस्तेमाल के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा और जिम्मेदारी का भी ध्यान रखना होगा।

शिक्षक का विकल्प नहीं, सहायक

प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि एआई शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी क्षमता बढ़ाने वाला सहायक उपकरण है। कार्यक्रम को शिक्षकों की डिजिटल दक्षता और तकनीकी आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। इसमें पीरामल फाउंडेशन के कर्मियों और विद्यालय परिवार के सहयोग के लिए आभार जताया गया।