फ्रांस में छाया बिहार के रुद्र मिश्रा का AI माडल, एक बीमार पेड़ ने जगाई जिज्ञासा
सीतामढ़ी के छात्र रुद्रचंद्र मिश्रा ने एक ऐसा एआई मॉडल विकसित किया है जो पौधों में बीमारी के लक्षण दिखने ...और पढ़ें

माडल के साल रुद्रचंद मिश्रा। सौ. स्वयं
HighLights
रुद्रचंद्र मिश्रा ने पौधों की सेहत बताने वाला AI मॉडल बनाया।
मॉडल बीमारी के लक्षण दिखने से पहले ही पहचान कर लेता है।
फ्रांस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 37वां स्थान हासिल किया।
दीपक कुमार, सीतामढ़ी। एक बीमार पेड़ ने दसवीं कक्षा के छात्र रुद्रचंद्र मिश्रा के मन में ऐसा सवाल पैदा किया, जिसने उन्हें प्रयोगशाला से होते हुए फ्रांस के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया।
जिले के नाहर चौक निवासी और 10वीं के छात्र रुद्र चंद्र मिश्रा ने ऐसा एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) माडल तैयार किया है, जो पौधों में बीमारी के लक्षण दिखने से पहले ही उसकी सेहत बता देगा। साथ ही, पानी और पोषक तत्वों की जरूरत भी बताएगा। इस माडल को राष्ट्रीय स्तर पर चयन किया गया है।
रुद्र का माडल सेंसर से मिट्टी की नमी, तापमान और पौधे की स्थिति की निगरानी करता है। रुद्र बताते है कि जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में एक बीमार पेड़ देखकर आइडिया आया।
साल 2024 में माडल पर काम शुरू किया। माडल में 8-माइक्रोकंट्रोलर, एयर माड्यूल, मिट्टी सेंसर और कैमरा सिस्टम लगे हैं। जिसकी लागत 29 से 45 हजार आई जबकि छोटा माडल 10-15 हजार में बन सकता है।
रुद्र के इस नवाचार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पहचान मिली है। गत 16 व 17 सितंबर को फ्रांस के ल्योन में आयोजित इनोरोबो बाई एसआईडीओ 2026 में रुद्र ने अपने माडल का आनलाइन प्रस्तुतिकरण किया।
इसमें 37वां स्थान हासिल किया। आयोजन में 87 देशों के 1472 विद्यार्थियों ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर 37वां स्थान हासिल करना रुद्र के साथ-साथ सीतामढ़ी के लिए भी उल्लेखनीय उपलब्धि बताई जा रही है।

पौधों की जरूरतों को बताएगा यह माडल
रुद्र का यह माडल पौधे की स्थिति और मिट्टी की नमी पर लगातार नजर रखता है। इसका उद्देश्य बीमारी के स्पष्ट लक्षण सामने आने से पहले पौधे में होने वाले बदलावों को पहचानना है।
यह माडल न केवल पौधे को पानी की आवश्यकता, जरूरी पोषक को बताता है बल्कि तत्वों व पानी की जरूरत होने पर टंकी से आवश्यक मात्रा में पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी इसमें जोड़ी गई है।
रुद्र ने बताया कि साल 2024 में इस माडल पर काम शुरू किया। जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के दौरान एक बीमार पेड़ को देखकर उनके मन में यह विचार आया।
विज्ञान शिक्षक नवल किशोर के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रयोग शुरू किए। लाकडाउन के दौरान इंटरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रानिक्स और तकनीक की प्रारंभिक जानकारी हासिल करने के बाद लगातार प्रयोग कर माडल को विकसित किया।
जिला व राज्य स्तर पर प्रस्तुतिकरण के बाद इस माडल का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ। देशभर से करीब 400 विद्यार्थियों का चयन किया गया था, जिसमें बिहार के 14 विद्यार्थी शामिल थे।
सेंसर और कैमरे से होगी निगरानी..
माडल में आठ सूक्ष्म नियंत्रक (माइक्रोकंट्रोलर), विभिन्न सेंसर, वायु माड्यूल, मिट्टी की नमी मापने वाले सेंसर और कैमरा प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। इनसे मिलने वाली जानकारी के आधार पर पौधे और मिट्टी की स्थिति को समझने का प्रयास किया जाता है।
इसे तैयार करने में करीब 29 से 45 हजार रुपये की लागत आती है। रुद्र इसे कम लागत में तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। छोटे माडल को करीब 10 से 15 हजार रुपये में तैयार करने की योजना है।
किसानों के लिए होगा उपयोगी
रुद्र अब अपने माडल को और विकसित करना चाहते हैं। प्रयास है कि कम बारिश या पानी की कमी की स्थिति में उपलब्ध जल के अनुसार किसानों को उपयुक्त फसल चुनने में भी मदद मिल सके। इससे सिंचाई की आवश्यकता समझने और पानी के बेहतर उपयोग में सहायता मिल सकती है।
सेक्रेड हार्ट स्कूल के निदेशक क्रिस्टोफर राज ने कहा कि रुद्र ने अपनी जिज्ञासा और लगन को एक उपयोगी प्रयोग में बदला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली यह उपलब्धि पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में प्रयोग करने के अवसर मिलें।
एक जिज्ञासा से मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
शहर के नाहर चौक बसंत बिहार निवासी व रुद्र के पिता अधिवक्ता रितेश कुमार व माता मौसमी मिश्रा बताती है कि माडल तैयार करने में परिवार का भी सहयोग मिला।
जिस बीमार पेड़ ने रुद्र के मन में एक सवाल पैदा किया था, उसी सवाल का जवाब तलाशते हुए उनका प्रयोग अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है। जिज्ञासा को प्रयोग और प्रयोग को निरंतर मेहनत का साथ मिले तो एक छोटा विचार भी बड़ी पहचान बना सकता है।
रुद्र के माडल को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है यह जिले के लिए गौरव की बात है। ऐसे प्रतिभाशाली छात्र को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसे प्रतिभा को निखारने के लिए बालि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जाता है।
-राघवेंद्र मणि त्रिपाठी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सीतामढ़ी।
