सीतामढ़ी की टीचर शमा परवीन को राजकीय शिक्षक पुरस्कार, कभी खाली नहीं रहने देतीं क्लास
State Teacher Award Bihar: सीतामढ़ी की प्रधान शिक्षिका शमा परवीन को शिक्षण में उनके समर्पण और नवाचार के लिए राजकीय ...और पढ़ें

शमा परवीन, प्रधान शिक्षिक, प्राथमिक विद्यालय कोइरी टोला धनुषी, रुन्नीसैदपुर, सीतामढ़ी। फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। Shama Parveen Sitamarhi: घर में शिक्षा का वातावरण मिला तो बचपन में ही किताबों से गहरा लगाव हो गया। शिक्षक पिता की प्रेरणा से शिक्षा को करीब से समझने वाली शमा परवीन ने शिक्षण को सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम बना लिया।
उनके इसी समर्पण और नवाचार को देखते हुए शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर उन्हें पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
हर विषय पढ़ाने में सक्षम
वर्तमान में वह रुन्नीसैदपुर प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय कोइरी टोला धनुषी में प्रधान शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। मूल रूप से सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका होने के बावजूद वह जरूरत पड़ने पर बच्चों को अंग्रेजी, विज्ञान और संस्कृत भी पूरी तन्मयता से पढ़ाती हैं।
संस्कृत व्याकरण व अनुवाद में गहरी पकड़ के कारण उन्होंने कक्षा छह से दस तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं भी कुशलतापूर्वक संभाली हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सफर
समस्तीपुर के दलसिंहसराय में जन्मीं शमा परवीन के पिता स्व. मोहम्मद जमील अख्तर उच्च विद्यालय में सहायक शिक्षक थे। उर्दू व अरबी से प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने आरबी कॉलेज दलसिंहसराय से स्नातक किया और डीसीए, बीएलआईएस, एमएलआईएस सहित बीएड की उपाधियां प्राप्त कीं।
वर्ष 2011 में टीईटी उत्तीर्ण करने के बाद वर्ष 2013 में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक बनीं और बाद में बीपीएससी प्रधान शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण कर धनुषी में पदस्थापित हुईं।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व
एनसीईआरटी के छह महीने के विशेष पाठ्यक्रम के लिए देशभर से चयनित गिने-चुने शिक्षकों में शमा परवीन का नाम भी शामिल रहा।
उन्होंने नई दिल्ली स्थित एनसीईआरटी मुख्यालय में आयोजित 21 दिवसीय कार्यशाला में बिहार राज्य का गौरव बढ़ाया। शिक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पूर्व में टीबीटी पुरस्कार, टीचर ऑफ द मंथ और गार्गी सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
आर्ट और एआई में सक्रिय
शमा परवीन ने शिक्षण पद्धतियों और शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर शोधपत्र प्रस्तुत करने के साथ काव्य रचनाएं भी की हैं।
वर्तमान में वह बिहार की क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार हो रही बाल-केंद्रित पुस्तकों के लिए चित्रांकन का कार्य भी संभाल रही हैं। उनके द्वारा बनाए गए जीवंत चित्र प्राथमिक स्तर के नौनिहालों के लिए पठन-पाठन को अत्यंत सहज, सुगम और रोचक बना रहे हैं।
