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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ओम नम: शिवाय :: बाबा मानेश्वर नाथ महादेव

By JagranEdited By:
Published: Thu, 01 Aug 2019 12:17 AM (GMT+05:30)Updated: Thu, 01 Aug 2019 06:33 AM (GMT+05:30)

सीतामढ़ी। जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर उत्तर-पूरब में स्थित है बाबा मानेश्वरनाथ मंदिर। मंदिर का शिवलिग जमीन से दस फीट ...और पढ़ें

ओम नम: शिवाय :: बाबा मानेश्वर नाथ महादेव
ओम नम: शिवाय :: बाबा मानेश्वर नाथ महादेव

सीतामढ़ी। जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर उत्तर-पूरब में स्थित है बाबा मानेश्वरनाथ मंदिर। मंदिर का शिवलिग जमीन से दस फीट नीचे स्थापित है। कहा जाता है कि दशकों पहले इस जगह का नाम मनियारी था। खुदाई के बाद जब शिवलिग निकला तो इस स्थान का नाम मनियारी से बदलकर मानेश्वरनाथ रखा गया। आस्था के प्रतीक मानेश्वर स्थान में हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इतिहास

चोरौत प्रखंड के यदुपट्टी बाजार स्थित एनएच 104 से महज कुछ ही दूरी पर स्थित बाबा मानेश्वरनाथ नाथ मंदिर है। मंदिर का शिवलिग जमीन से 10 फीट नीचे स्थित है। मंदिर की स्थापना किसने की कोई नहीं जानता। खुदाई के दौरान यहां पत्थर, कुंआ एवं पुरातत्व का अवशेष मिला था। इसी खुदाई में बाबा का शिवलिग भी मिला। उसी समय से यहां आस्था का सैलाब उमड़ता रहा है। लोगों का मानना है कि यह शिवलिग अति प्राचीन है। इसकी स्थापना प्राचीन काल में हुई थी। आज यह मंदिर बाबा मानेश्वरनाथ के नाम से प्रसिद्ध है। विशेषता

यहां सुबह तीन बजे से ही मंदिर में जलाभिषेक शुरू हो जाता है। कड़ाके की ठंड हो या भीषण गर्मी, यहां हमेशा भीड़ लगी रहती है। खासकर सावन में यहां आस्था का मंजर दिखता है। जो लोग सालों भर ब्रह्म मुहूर्त में जलाभिषेक करते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती हैं। यहां प्रत्येक सोमवारी को अनिवार्य रूप से शिवचर्चा होती है। मंदिर के परिसर में विवाह मंडप है। यहां शादी विवाह, जनेऊ आदि धार्मिक कार्यो का अनुष्ठान किया जाता है। बसंत पंचमी, सावन, शिवरात्रि आदि के अवसर पर मेला का आयोजन किया जाता है। बोले पुजारी

बाबा मानेश्वरनाथ नाथ मंदिर में प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक करने से दंपत्ती की मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि यहां खासकर सावन, सोमवार, रविवार, बसंत पंचमी, शिवरात्रि के अवसर पर भारत के अलावा नेपाल से भी आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

- लालबाबू दास, पुजारी। बोले ग्रामीण

बाबा मानेश्वरनाथ महादेव की महिमा अपरंपार है। यहां जो भी दर्शन करने आते हैं खाली हाथ नहीं लौटते हैं। यहां पूजा-अर्चना के लिए कोई विशेष चढ़ावा की आवश्यकता नहीं होती है। फूल, बेलपत्र, भांग और शम्मी पत्र से शिवदानी प्रसन्न हो जाते हैं।

- नागे मांझी, ग्रामीण।

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