सीतामढ़ी। अनुमंडल मुख्यालय पुपरी शहर में नगर पंचायत के गठन के बाद तेजी से रिहायशी बस्तियां आबाद हुई। रेलवे लाइन के पश्चिम भाग में शहर का विस्तार काफी तेजी से हुआ है। हालांकि, शहरी सुविधाओं का अब तक उस अनुपात में विस्तार नहीं हो पाया है। रेलवे लाइन के दक्षिण और पश्चिम भाग में नए मोहल्ला भी बस गया है। इसके अलावा पुपरी पंचायत के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी भी है। लेकिन हजारों की आबादी के लिए शहर में प्रवेश करने का एकमात्र रास्ता भूलन चौक रेलवे गुमटी से होकर गुजरता है। जहां लोगों को प्रतिदिन हलकान होना पड़ रहा है। जनकपुर रोड रेलवे स्टेशन का यह 36 नंबर गुमटी बंद रहने की स्थिति में लोगों को रोज घंटों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहनों के लिए भी फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। काफी लंबे समय से आरओबी का निर्माण किए जाने मांग हो रही है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने से आज की तारीख में हजारों की आबादी हर दिन खतरे से जूझते हुए बंद गुमटी एवं रेल लाइन पार का आते-जाते हैं। वार्ड 7 निवासी राकेश झा बताते है कि गुमटी बंद होने की स्थिति में लोगों के पास उस पार जाने का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है। भूलन चौक पर कम से कम पैदल और दुपहिया वाहनों के लिए ब्रिज का होना अति आवश्यक है। गुमटी पर आरओबी निर्माण की घोषणा कागज पर ही धूल फांक रही है। आरओबी की स्वीकृति मिलने की बात साल भर से कही जा रही है। ऐसे में आरओबी का निर्माण कब तक पूरा होगा कहना मुश्किल है, अभी तो शुरू भी नहीं हुआ है। पुपरी गांव निवासी हरि किशोर प्रेमी कहते हैं कि हर दिन की समस्या से लोग त्रस्त है। पुपरी रत्नलक्ष्मी निवासी राजन कुमार उर्फ लादेन कहते है कि समस्या विकराल है। जनप्रतिनिधि ही नहीं, रेल प्रशासन इस दिशा में मौन है। बीमार और गर्भवती महिलाओं को आपातकाल की हालत में किसी अनहोनी की संभावना बनी रहती है। स्थिति यह है कि गुमटी बंद रहने से साइकिल से भो लोग नही निकल सकते। लोगों के पास कोई वैकल्पिक रास्ता है नहीं, लोग क्या करें। अधिकारियों की गाड़ियां भी फंसती हैं, पर कोई ध्यान नहीं देता। ग्रामीण पप्पू शर्मा बताते है कि जब तक आरओबी नहीं बनता समस्या यथावत बनी रहेगी। बताया कि छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल और ट्यूशन जाने के समय काफी परेशानी होती है। घर में अगर कोई बीमार है तो दवा समय से नहीं ला पाते हैं। इस क्षेत्र के लोगों का रोजगार और व्यवसाय पुपरी बाजार में है।

24 घंटे में करीब चौबीस बार बंद होता फाटक : भूलन चौक गुमटी का फाटक 24 घंटों में करीब दो दर्जन बार बंद होता है। कुछ ट्रेनें साप्ताहिक है और सवारी गाड़ियों का अपना अलग समय निर्धारित है। अगर साप्ताहिक और सवारी गाड़ियों की आवाजाही को छोड़ दे तो प्रतिदिन मालगाड़ियों का आवागमन परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके अलावे स्टेशन पर रैक प्वाइंट होने से दिन में बार-बार फाटक का बंद होना निश्चित है। एक बार फाटक बंद होने पर उसे खुलने में करीब दस से पंद्रह मिनट लगते हैं। इतनी देर में गाड़ियों की कतार लग जाती है। आवागमन में कितनी असुविधा होती होगी इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

सुबह से रात तक होती परेशानी : पुपरी पंचायत के अलावा स्टेशन के दक्षिण-पश्चिम भाग में रहने वाले नगर के वार्ड 7 और 8 की आधी आबादी इस समस्या से त्रस्त है। सबसे अधिक परेशानी सुबह और शाम के समय होती है। सुबह में 5 से 11 बजे तक कई गाड़ियां गुजरती हैं। इस समय स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों के साथ बीआरसी जाने वाले शिक्षकों को निकलने की जल्दी होती है। अगर गुमटी पर फंस गए तो देर होना तय है। वहीं शाम के समय साढ़े तीन से साढ़े सात बजे तक फाटक बहुत कम अंतराल पर बंद होता है। उस समय बाजार में काफी भीड़ होती है। कई बार तो जाम के कारण फाटक गिराना मुश्किल हो जाता है। सुबह व शाम के समय शहर में प्रवेश करने या बाहर निकलने के लिए यह एकमात्र रास्ता इस गुमटी से होकर गुजरता है।

फाटक बंद होने पर लगाना पड़ता फेरा

: शहर में प्रवेश का दूसरा कोई मार्ग नहीं होने के कारण गुमटी बंद रहने की स्थिति में लोग कई किलोमीटर घूम कर ही शहर में प्रवेश कर पाते हैं। गुमटी बंद रहने पर लोग अक्सर गुमटी के बगल से रैक पॉइंट होकर जान हथेली पर लेकर राजबाग 34 नंबर गुमटी जाते है। अगर वहां भी बंद रहा तो फिर भगवती पथ से होते हुए झझिहट पहुंचते हैं। वहां भी गुमटी बंद रहा तो घंटों कोसने की स्थिति बनी रहती है। काफी जल्दबाजी हो तो बेलमोहन के रास्ते बिरौली पुलिया के समीप गुमटी नंबर 37 का प्रयास विफल हो जाता है। इस क्षेत्र के लोगों को काफी लंबी दूरी तय करने के बाद खोपी के रास्ते अनुमंडल और जिला मुख्यालय का रास्ता मिलता है।

Posted By: Jagran

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