सीतामढ़ी। लूट की अफवाह फैला एक युवक की पीट-पीट कर हत्या की घटना के बाद समाज शर्मसार है। वहीं पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। एक तो रीगा थाना पुलिस ससमय मौका ए वारदात पर नहीं पहुंची और दूसरी पुलिस ने पिकअप वैन चालक समेत डेढ़ सौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ली। पुलिस ने तत्काल ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे मृतक के परिजनों के कलेजे में धधकती आग की ज्वाला कम हो सके। दो दिन बाद भी पुलिस केवल कार्रवाई की बात कह रही है, लेकिन अब तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। जबकि, घटना का वीडियो तेजी से वारल हो रहा है। वाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्वीटर और फेसबुक पर पिटाई की लाइव वीडियो के अलावा अलग-अलग तस्वीर लोग शेयर कर रहे हैं, इसकी ¨नदा कर रहे है। रमनगरा कांड की आग अब देश स्तर पर पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में भी मानवाधिकार संगठनों से जुड़े लोग घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दे रहे हैं। अधिवक्ता, चिकित्सक, प्राध्यापक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल :रमनगरा कांड की चहुंओर ¨नदा हो रही है। हर कोई घटना पर दुख जता रहा है। हर कोई सवाल उठा रहा है कि हमारा समाज आखिर इतना ¨हसक क्यों हो गया है। हर कोई आरोपियों को कड़ी सजा देने की बात कर रहा है। हमने की समाज के प्रबुद्ध वर्ग से बात की। लोगों ने इस घटना पर गहरा दुख जताया। पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। लेकिन, हर किसी ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया। वरिष्ठ अधिवक्ता विमल शुक्ला ने कहा कि किसी को भी कानून को हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। कानून इसकी इजाजत नहीं देता। आरोपियों पर हत्या का मुकदमा चलेगा। कोर्ट जब तक किसी को दोषी करार नहीं देता, सजा का प्रावधान नहीं है। पुलिस अगर त्वरित कार्रवाई करती तो शायद युवक की जान बच सकती थी। समाजसेवी राम शरण अग्रवाल ने सीधे तौर पर कहा कि जिले में पूरी तरह से कानून का भय समाप्त हो गया है। सड़क से कोर्ट तक कानून का भय किसी को नहीं है। जाहिर है कि जब कानून का भय समाप्त होगा तो इस तरह के निरपराध मारे ही जाएंगे। चिकित्सक डॉ. कुणाल शंकर ने कहा कि रमनगरा की घटना दुखद है। लोगों को बगैर सोचे-समझे पिटाई नहीं करनी चाहिए थी। लोगों को चाहिए था कि युवक को पुलिस को सौंप दे। कहा कि अब भी समय है कि समाज के लोग इस घटना से सबक लें और भविष्य में कभी भी कानून को अपने हाथ में नहीं लें। प्रो. उमेश चंद्र झा ने कहा कि लोगों ने बगैर सोचे समझे उसे अपराधी समझ लिया और बेरहमी से पिटाई कर दी। अगर सही मायने में किसी अपराधी को पकड़ कर लोग पीटते हैं तो वह भी एक सीमा तक हीं जायज है, लेकिन बगैर पहचान के ही मौत के घाट उतार देना गलत है। कानून को हाथ में लेना गुनाह है। आरोपी को सजा देने के लिए इंसाफ का मंदिर है।

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पिकअप वैन चोरी के आरोप में भीड़ ने ली थी रूपेश की जान

रीगा थाना क्षेत्र के रमनगरा के पास पिकअप वैन चालक से लूट की अफवाह के बाद रविवार को सहियारा थाना के ¨सगरहिया निवासी रूपेश कुमार झा की

ग्रामीणों ने बेरहमी से पिटाई की थी। उसकी पीएमसीएच पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन शव लेकर ¨सगरहिया पहुंचे। जहां पुलिस-प्रशासन के खिलाफ गुस्से का इजहार करते हुए बगैर पोस्टमार्टम के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। सोमवार को घटना की बाबत रीगा थाने में भवदेपुर के चौकीदार जितेंद्र कुमार ¨सह के आवेदन पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई, इसमें पिकअप वैन चालक सहियारा थाना क्षेत्र के धर्मपुर निवासी प्रमोद पासवान के अलावा रमनगरा गांव के 150 ग्रामीणों को आरोपित किया गया।

Posted By: Jagran