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नेपाल की 100 रुपये वाली भंसार नीति से बॉर्डर पार लोगों का बढ़ा आक्रोश, सीमावर्ती बाजार भी प्रभावित

By Bishwanath Chaudhary Edited By: Ajit kumar
Published: Mon, 20 Apr 2026 07:28 PM (IST)

India-Nepal Border Trade Restrictions: नेपाल की 100 रुपये की भंसार नीति के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में आक्रोश बढ़ गया है, ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई की मदद से तैयार की गई है।

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संवाद सहयोगी, बैरगनिया (सीतामढ़ी)। Bairgania Trade News: भारत-नेपाल सीमा पर 100 रुपये से अधिक की खरीदारी पर भंसार (कस्टम ड्यूटी) अनिवार्य किए जाने के फैसले ने सीमावर्ती इलाकों में असंतोष बढ़ा दिया है।

नेपाल सरकार की इस सख्ती का असर अब दोनों देशों के बॉर्डर क्षेत्रों में साफ नजर आने लगा है, जहां आम लोग और व्यापारी दोनों परेशान हैं।

पुराने नियम पर नई सख्ती

हालांकि 100 रुपये से अधिक के सामान पर भंसार का नियम पहले से मौजूद था, लेकिन इसे लेकर पहले इतनी सख्ती नहीं बरती जाती थी। छोटे स्तर की खरीदारी पर लोगों को राहत मिलती थी, जिससे सीमावर्ती बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती थी। अब सख्ती बढ़ने से हालात बदल गए हैं।

बैरगनिया बाजार में घटी ग्राहकों की संख्या

सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया जैसे सीमावर्ती बाजारों में नेपाली ग्राहकों की संख्या में स्पष्ट गिरावट देखी जा रही है। पहले जहां रोज सैकड़ों ग्राहक खरीदारी के लिए आते थे, अब उनकी संख्या काफी कम हो गई है। इसका असर किराना, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री पर पड़ा है।

कारोबार पर पड़ा सीधा असर

ग्राहकों की कमी से छोटे दुकानदारों, फुटपाथ विक्रेताओं और खुदरा व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ है। व्यापारियों के अनुसार उनका 30 से 50 प्रतिशत तक का कारोबार नेपाली ग्राहकों पर निर्भर था, जो अब घट गया है।

आवागमन भी हुआ प्रभावित

सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि सीमा पार आवागमन की सहजता भी इस नियम से प्रभावित हुई है। बार-बार जांच और शुल्क के डर से लोग अब कम ही सीमा पार कर रहे हैं, जिससे पहले जैसी चहल-पहल भी कम हो गई है।

नेपाल में विरोध तेज

नेपाल के कई सीमावर्ती इलाकों में इस नीति के खिलाफ विरोध देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी कम राशि पर भंसार लगाना आम नागरिकों के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है और रोजमर्रा की जरूरतें महंगी हो जाएंगी।

सरकार का पक्ष

नेपाल प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और अवैध व्यापार पर रोक लगाना है। हालांकि जमीनी स्तर पर इसका असर सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक रूप से पड़ता दिख रहा है।