हिट एंड रन मामला: सीतामढ़ी में 163 पीड़ितों को मिला मुआवजा, 63 मामले पेंडिंग
सीतामढ़ी जिले में हिट एंड रन मामलों में अब तक 163 पीड़ितों को मुआवजा दिया गया है, जबकि 226 आवेदनों में से 63 मामले अभी भी लंबित हैं।

सीतामढ़ी परिवहन कार्यालय। (फाइल फोटो)
HighLights
सीतामढ़ी में 163 हिट एंड रन मामलों में मुआवजा भुगतान।
मृत्यु पर आश्रितों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता।
भुगतान प्रक्रिया एफएआर और आई-रेड ऐप से होती है।
जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। सड़क दुर्घटना में टक्कर मारने वाले वाहन का पता नहीं चलने पर पीड़ितों और उनके आश्रितों को आर्थिक मदद देने की व्यवस्था के तहत जिले में अब तक 163 मामलों में मुआवजे का भुगतान किया गया है।
हिट एंड रन के कुल 226 मामलों में मुआवजे के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं। शेष लंबित 63 मामलों में विभागीय प्रक्रिया जारी है। योजना के तहत सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर मृतक के पात्र आश्रितों को दो लाख रुपये देने का प्रावधान है।
अज्ञात वाहन के मामलों में मिलती है सहायता
हिट एंड रन उन सड़क दुर्घटनाओं को कहा जाता है, जिनमें दुर्घटना करने वाले वाहन की पहचान नहीं हो पाती है। ऐसे मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार पीड़ित या उनके आश्रित मुआवजे के लिए दावा कर सकते हैं।
मृत्यु की स्थिति में पात्र आश्रितों को दो लाख रुपये की सहायता दी जाती है। जिला परिवहन पदाधिकारी निशांत कुमार के अनुसार, एक अप्रैल 2022 से इस योजना के तहत पात्र दावेदारों को मुआवजा दिया जा रहा है।
एफएआर से शुरू होती है भुगतान की प्रक्रिया
जिला परिवहन पदाधिकारी निशांत कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना होने पर सबसे पहले फर्स्ट एक्सीडेंट रिपोर्ट (एफएआर) तैयार की जाती है।
दुर्घटना से जुड़ी जानकारी आई-रेड (इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) ऐप पर दर्ज की जाती है। इसमें दुर्घटनास्थल, वाहन और पीड़ित से संबंधित विवरण शामिल किए जाते हैं।
आवेदन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पात्र पीड़ित या आश्रित को मुआवजे का भुगतान किया जाता है। योजना की जानकारी और आवेदन संबंधी सहायता के लिए जिला परिवहन कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
ब्लैक स्पॉट की पहचान कर होंगे सुरक्षा उपाय
सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिले में दुर्घटना संभावित स्थलों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर सुरक्षा उपाय करने पर जोर दिया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने सड़क निर्माण एजेंसियों को दुर्घटना वाले स्थलों का रोड सेफ्टी ऑडिट कराने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है। आई-रेड ऐप पर दर्ज आंकड़ों के विश्लेषण से दुर्घटनाओं के कारणों और संवेदनशील स्थलों की पहचान करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर सड़क सुरक्षा के उपाय किए जाएंगे।
