सीतामढ़ी। पिछले 6 मई से प्रवासियों के लौटने का सिलसिला लगातार जारी है। मंगलवार को एक दिन में 12 ट्रेनें आनी थीं लेकिन पांच ही समय पर पहुंच पाईं। सात ट्रेनों का पता नहीं लग पाया। उनमें से कई ट्रेनें दो-तीन दिन पहले ही रवाना हुईं हैं मगर अधिकारियों को उनके बारे में पता नहीं चल पा रहा है। मंगलवार को आने वाली ट्रेनों में अहमदाबाद-दरभंगा वाया सीतामढ़ी से 218, सूरत-सीतामढ़ी से 1450, सूरत-मधुबनी वाया सीतामढ़ी से मात्र 15, सूरत-मधुबनी वाया सीतामढ़ी से 144 तथा मुंबई-दरभंगा वाया सीतामढ़ी से 162 यानी इन पांच ट्रेनों से 1989 प्रवासी पहुंचे। अन्य सात ट्रेनों के इंतजार में जिला प्रशासन व रेल प्रशासन दिनभर स्टेशन पर डटे रहे। अभी इन ट्रेनों से 10 हजार प्रवासियों के लौटने के आसार हैं। प्रवासियों को भोजन के पैकेट व बोतल बंद पानी दिया गया। उनको सुरक्षित ट्रेन से उतारकर मास्क पहनाया गया। उनसे शारीरिक दूरी का पालन करने को कहा गया। सबकी थर्मल स्क्रीनिग कराई गई, उनके लगेज को सैनिटाइज किया गया। स्टेशन पर अपने आवभगत से सभी अभिभूत थे। बसों से क्वारंटाइन सेंटर रवाना किए गए प्रवासी

ट्रेन आने के पूर्व पूरे स्टेशन परिसर को सैनिटाइज किया गया। बसों से उन्हें उनके संबंधित क्वारंटाइन सेंटरों के लिए पुलिस सुरक्षा में रवाना किया गया। जैसे ही ट्रेन एक नंबर प्लेटफार्म पर पहुंची राजकीय रेल पुलिस के थानाध्यक्ष राजकुमार राम व रेलवे सुरक्षा बल के निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार, उप निरीक्षक पीके झा सुरक्षा बलों के साथ ट्रेन को अपनी अभिरक्षा में ले लिया। जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम सदर आइएएस कुमार गौरव, एसडीपीओ डॉ. कुमार वीर धीरेंद्र, एसडीएम रोचना माद्री तथा स्टेशन अधीक्षक मदन प्रसाद, उप स्टेशन अधीक्षक सुरेंद्र कुमार सिंह व पूछताछकर्मी मनोरंजन सिंह भी मौजूद थे। वही राजकीय रेल पुलिस की महिला टीम लीडर एएसआइ मंजू कुमारी, हवलदार पवन देवी, आरक्षी पूनम कुमारी, रेखा रानी, अस्मिता कुमारी, प्रतिमा कुमारी व मिता कुमारी के साथ स्टेशन पर कोरोना योद्धा की तरह डटी रहीं।

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Posted By: Jagran

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