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वीडियो कॉल पर बेटी की विदाई देख थमी पिता की धड़कन, लखनऊ के अस्पताल में भर्ती थे लालबाबू

Published: Fri, 26 Jun 2026 01:36 PM (GMT+05:30)Updated: Fri, 26 Jun 2026 02:26 PM (GMT+05:30)

Daughter Bidaai Video Call: पिता लालबाबू महतो ने लखनऊ के अस्पताल से वीडियो कॉल पर अपनी बेटी निधि की शादी ...और पढ़ें

लालबाबू महतो (फाइल फोटो) व उनकी छोटी बेटी निधि की शादी की तस्वीर। फोटो सौ: स्वजन

लालबाबू महतो (फाइल फोटो) व उनकी छोटी बेटी निधि की शादी की तस्वीर। फोटो सौ: स्वजन

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संवाद सहयोगी, सोनबरसा (सीतामढ़ी)। Sitamarhi Emotional Story: कहते हैं एक पिता के जीवन का सबसे बड़ा और भावुक क्षण वह होता है, जब वह अपनी लाडली का कन्यादान करता है। अपनी पाई-पाई जोड़कर बेटी को रानी की तरह विदा करने का ख्वाब हर बाप देखता है।

सोनबरसा बस स्टैंड के रहने वाले लालबाबू महतो की आंखों में भी अपनी सबसे छोटी बेटी निधि के लिए यही अरमान तैर रहे थे। बुधवार की रात निधि के हाथ पीले हुए, घर में शहनाइयां गूंजीं, लेकिन नियति की लिखी स्क्रिप्ट इतनी क्रूर थी कि जिसे सुनकर पूरा इलाका सिसक उठा।

इधर बेटी की डोली उठी, और उधर सैकड़ों किलोमीटर दूर लखनऊ के एक अस्पताल में वीडियो कॉल पर यह विदाई देख रहे पिता ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं।

नम आंखें और स्क्रीन पर 'वरमाला'

लालबाबू महतो सालों तक बस में कप्तानी (कंडक्टरी) कर अपने परिवार का पेट पालते रहे। तीन बेटों और दो बेटियों के इस भरे-पूरे परिवार में सबसे छोटी बेटी निधि की शादी को लेकर वो बेहद उत्साहित थे।

तैयारियां जोरों पर थीं, लेकिन शादी से ठीक तीन दिन पहले अचानक उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें आनन-फानन में लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उनके साथ पत्नी मीनू देवी और बेटा राजेश भी लखनऊ चले गए।

घर पर सिसकियां थीं, लेकिन लालबाबू की ही जिद थी कि बेटी की शादी तय तारीख पर ही हो। बुधवार की रात सीतामढ़ी में विवाह की रस्में शुरू हुईं।

लखनऊ के आईसीयू बेड पर लेटे लालबाबू के सामने मोबाइल की स्क्रीन ऑन थी। वीडियो कॉल के जरिए उन्होंने अपनी लाडली को दुल्हन बनते देखा। जब निधि ने दूल्हे को वरमाला पहनाई, तो अस्पताल के बेड पर बेबस पड़े पिता की आंखें खुशी और लाचारी के आंसुओं से छलक उठीं।

जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए भी एक पिता की सांसें सिर्फ इसलिए अटकी थीं, ताकि वह अपनी लाडली को विदा होते देख सके।

आंसुओं के साथ थम गईं पिता की सांसें

गुरुवार की सुबह करीब 9 बजे का वक्त था। विवाह संपन्न हो चुका था और अब निधि की विदाई की बेला थी। मायके से पैर भारी कर जैसे ही निधि डोली (गाड़ी) में बैठी, लखनऊ के अस्पताल में वीडियो कॉल की स्क्रीन पर लालबाबू महतो फफक कर रो पड़े।

उधर बेटी बाबुल का घर छोड़ रही थी, इधर पिता इस नश्वर संसार को छोड़ने की तैयारी कर रहा था। दिल को झकझोर देने वाली बात यह रही कि जैसे ही निधि की विदाई का वीडियो कॉल कटा, उसके कुछ ही मिनटों बाद लालबाबू महतो की धड़कनें हमेशा के लिए शांत हो गईं।

निधि के ससुराल पहुंचते ही पिता के निधन की खबर आ गई। जिस घर से कुछ देर पहले मंगलगीत गाकर बेटी को विदा किया गया था, वहां अब चित्कार गूंज रही थी।

लाडली की डोली उठने का इंतजार शायद लालबाबू की आखिरी सांसें भी कर रही थीं, और फर्ज पूरा होते ही वो अनंत यात्रा पर निकल गए।