सीतामढ़ी। दैनिक जागरण का संपादकीय महाअभियान जो उपजाएं अन्न वो क्यों न हो संपन्न के तहत किसान जागरूकता रथ शनिवार को पुपरी में था। बलहा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। आायोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व सांसद नवल किशोर राय, केंद्र सचिव सुदिष्ट कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी योगेंद्र प्रसाद ¨सह, केंद्र प्रधान और वरीय वैज्ञानिक राम ईश्वर प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यशाला में किसानों ने खेती से संबंधित समस्याएं गिनाई। खेती की समाप्ति पर खाद बीज की उपलब्धता बेमानी साबित होती है। किसान कभी बाढ़ एवं कभी सुखाड़ से बर्बाद होते हैं। सरकारी सुविधा से अनभिज्ञ यहां के लोग महंगी खेती को विवश हैं। ¨सचाई के लिए यहां कई ट्यूबेल लगे पर उसका वजूद तक मिट गया है। लोग डीजल पंपसेट से ही ¨सचाई करते हैं। किसानों का दर्द था कि उन्हें समय पर न तो डीजल अनुदान मिलता है और नहीं रोडमैप अथवा फसल क्षति की राशि। सरकारी योजनाओं की सूचना इन्हें समाचार पत्रों से ही मिलती है। धान व गेहूं के बीज के लिए किसानों को काफी समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है। ऐसे न तो किसानों को खाद मिलता है और नहीं बिजली। सिचाई के लिए भले ही लंबी चौड़ी योजनाएं चल रही हो, लेकिन धरातल पर योजनाएं फिसड्डी साबित हो रही है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद नवल किशोर राय ने किसान से जुड़े इस अभियान को शुरू करने के लिए सबसे पहले दैनिक जागरण की सराहना की। कहा कि कोई भी संस्था अपने स्थापना दिवस पर लोगो को आकर्षित करने के लिए कार्यक्रम करती है। लेकिन, मीडिया जगत में पहली बार देखा जा रहा है कि जागरण 75वें स्थापना पर किसानों की हालत को लेकर संपादकीय अभियान चलाया है। उन्होंने किसानों के लिए राज्य सरकार की योजनाओं पर चर्चा की। कहा कि अब कृषि के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। लेकिन, जरूरत है किसानों को समेकित खेती की ओर बढ़ने की। रासायनिक खेती की जगह जैविक खेती पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह कृषि को उद्योग का दर्जा मिलने पर ही समृद्धि आएगी। प्रखंड कृषि पदाधिकारी योगेंद्र प्रसाद ¨सह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के किसान कृषि पर आधारित सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक तकनीकी, कृषि ऋण जैसी सुविधा हासिल कर रहे हैं। उन्होंने जीरो टिलेज तकनीक से करने पर जोर दिया। कहा कि सभी पंचायतों में कृषि कार्यालय की व्यवस्था की जा रही है। जहां किसानों की हर समस्याओं का निदान किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने सीधे खाते में मिलने वाले सभी प्रकार के अनुदान की राशि पर चर्चा करते हुए किसानों को डीबीटी कराने से पंद्रह दिनों के भीतर खाते में अनुदान मद की राशि पहुंचने की जानकारी दी। केंद्र में कुछ वर्मी कम्पोस्ट और मशरूम उत्पादक किसानों के समक्ष बिक्री की समस्या आने के सवाल पर उन्होंने केंद्र प्रभारी से संबंधित किसानों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की। वरीय वैज्ञानिक राम ईश्वर ने किसानों को मिट्टी जांच करा कर आधुनिक तकनीक से खेती पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी। पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. ¨ककर कुमार ने पशुओं में होने वाली विभिन्न प्रकार के रोग, स्वास्थ्य, आहार पर प्रकाश डाला। उन्होंने पशुओं को साल में काम से कम दो वार कृमि की गोली खिलाने, टीकाकरण कराने को प्रमुखता से बताया। उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार ने कहा कि किसान यदि फलदार वृक्ष की बागवानी करें तो इससे काफी कम समय में किसान अपनी आमदनी को दुगना कर सकते हैं। सचिव सुदिष्ट ने केंद्र के माध्यम से तकनीकी जानकारी लेकर खेती करने पर जोर दिया। करीब चार घंटे तक आयोजित कार्यशाला में किसानों की समस्या और सवालों का पदाधिकारी और वैज्ञानिकों ने जवाब दिए। मौके पर कृषि सलाहकार प्रेमकुमार झा, एटीएम राजनाथ गुप्ता, राघवेंद्र ठाकुर, अब्दुल जब्बार अंसारी, सुरेंद्र ¨सह, सीताराम मंडल, रमण कुमार, बैधनाथ राउत सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे। क्या कहते हैं किसान :

अन्नदाता को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाना हीं सबसे बड़ी समस्या है। अनाज क्रय केंद्र समय पर नहीं खुलना व विभागीय पेच से मुक्ति के बाद हीं अन्नदाताओं का भला संभव है। किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाएं सही समय पर क्रियान्वित हो तभी किसानों के लिए कारगर होगी। नहीं तो सरकारी योजनाएं कागज में चलती रहेगी और वास्तविक किसान इसी तरह वंचित होते रहेंगे।

--- सुरेंद्र ¨सह , किसान समर्थन मूल्य के अनुरूप किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाना किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। खेतिहर मजदूरों का पलायन व मजदूरी में बेतहाशा वृद्धि, ¨सचाई व्यवस्था की अनिश्चितता, आधुनिक तकनीक के प्रशिक्षण की कमी, कृषि यंत्रों की कमी, ससमय कृषि यंत्र व अनुदानित मूल्य पर खाद-बीज की अनुपलब्धता उन्नत खेती व अधिक पैदावार के लिए सबसे बड़ी समस्या है।

--- सीताराम मंडल, किसान

खेतिहर मजदूरों की उदासीनता तथा दिनोंदिन मजदूरी में हो रही वृद्धि खेती के आगे सबसे बड़ी बाधा है। किसानों द्वारा उपजाए गए अनाज को समर्थन मूल्य के अनुरूप बिक्री की गारंटी के बगैर किसानों की आमदनी में वृद्धि नहीं हो सकती है। इसके अलावा किसानों को डीजल अनुदान की जगह खेतों में बिजली की उपलब्धता, ससमय अनुदानित मूल्य पर खाद बीज की उपलब्ध कराया जाए तो खेतों में हरियाली व किसानों की संपन्नता संभव है।

--- अब्दुल जब्बार अंसारी, किसान

समुचित ¨सचाई की व्यवस्था हो। पंचायत स्तर पर सरकारी उर्वरकों की दुकान खोलने की व्यवस्था कृषि विभाग करे। क्योंकि प्रखंड स्तर पर दुकान नहीं होने से 20 किलोमीटर की दूरी है। खेती के लिए लाभकारी योजनाओं सही समय पर ईमानदारी से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था हो।

--- बैद्यनाथ राउत, किसान पहले से लगे अधिकतर सरकारी नलकूप ठप पड़े हैं। ¨सचाई के लिए बारिश का इंतजार रहता है। जो समय पर नहीं होने से फसल बर्बाद हो जाती है और फसल प्रभावित होती है, जिससे फसल आशा के अनुरूप नहीं होती है। इससे किसान की आमदनी कम हो जाती है। सभी नलकूप को चालू कर दिया जाए तो कम लागत में समुचित ¨सचाई का लाभ मिल सकेगा।

--- राघवेंद्र ठाकुर, किसान

Posted By: Jagran