सीतामढ़ी। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत लाभार्थियों द्वारा उद्योग स्थापित कर जिले में रोजगार सृजन की सरकारी पब्लिसिटी के बीच इसकी जमीनी सच्चाई जिम्मेदारों के लिए एक सबक है। उन्हें यह तय करना होगा कि यह क्या है तथा इसके लिए जवाबदेह कौन है, कबतक यू हीं चलता रहेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इसी महत्वाकांक्षी योजना की सच्चाई जानने की उधेड़बुन में रुन्नीसैदपुर के बलिगढ़ में सरकारी रिकार्ड में स्थापित पता-प्लेट उद्योग की पड़ताल के क्रम में उद्यमी सत्यनारायण चौधरी से मुलाकात की गई। उद्योग मंत्री के आगे प्रस्तुत उद्यमियों की सूची में इनका नाम सबसे ऊपर ही था। पता चला कि आराध्या पत्ता-प्लेट उद्योग के नाम से रजिस्टर्ड कंपनी की शुरुआत ही नहीं हुई जबकि, उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन के आगे इस उद्योग के द्वारा रोजगार सृजन का दावा किया जा रहा था।

मार्च 2020 में 10 लाख रुपये मिले उद्योग के लिए

उद्यमी सत्यनारायण चौधरी से मिली जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जाति /जनजाति उद्यमी योजना के तहत वर्ष 2019/20 में उनके उद्योग को स्वीकृति मिली। मार्च 2020 में योजना के अनुरूप उनके चालू खाते में 10 लाख की राशि भी भेज दी गई। पैसा आने पर उनके मोबाइल फोन पर मैसेज आया कि केबीसी आल इंडिया सिम कार्ड लक्की ड्रा में उन्हें विजेता घोषित किया गया है। 25 लाख रुपये का इनाम मिलेगा। आधार कार्ड, पैन कार्ड की प्रतिलिपि जमा कराने के बाद टैक्स व अन्य सर्विस चार्ज के नाम पर उनसे विभिन्न तिथियों व बैंक एकाउंट्स में कुल 04 लाख 56 हजार दो सौ पचास रुपये जमा करा लिए। जब उन्हें साइबर फ्रॉड का शिकार होने का अहसास हुआ तबतक काफी देर हो चुकी थी।

उन्होंने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, तीन लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। इस मामले में आधा दर्जन नामजद एकाउंट होल्डर आरोपितों में से तीन को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भेज दिया मगर, राशि की वसूली नहीं हो पाई। जिसके कारण उनका उद्योग चालू नहीं हो पाया। इस प्रकार, एक सफल उद्यमी बनने का उनका सपना पूरा नहीं हो पाया। अब हालांकि, उन्हें संतोष है कि प्राथमिक विद्यालय बलिगढ़ में शिक्षक की नौकरी हासिल हो चुकी है। बहरहाल, सत्यनारायण चौधरी का केस एक बानगी भर है। इसकी गहन जांच की जाए तो बड़े-बड़े जिम्मेदारों की फजीहत करा सकती है।

उद्योग विभाग के अधिकारियों को यह भी जानकारी नहीं कि सरकार के आगे प्रस्तुत सूचियों के अनुरूप रोजगार सृजन की बात तो दूर उद्योग-धंधे स्थापित हैं भी या नहीं।

बयान

मुझे इस बारे में कोई सूचना नहीं दी गई। अब पता चला तो जाच करवा लूंगा। यह सुनकर मैं खुद भी अचंभित हो गया।

बीके लाल, महाप्रबंधक, जिला उद्योग विभाग, सीतामढ़ी।

Edited By: Jagran