सीतामढ़ी। सीलन भरा छोटा कमरा। संकीर्ण सीढि़यां। न पर्याप्त रोशनी, शौचालय व अन्य बुनियादी सुविधाएं। अगलगी से बचाव के लिए कोई उपकरण और इमरजेंसी गेट तक नहीं। न आपदा बचाव का कोई साधन या ट्रेनिग। ऐसे में अगर कोई आपात स्थिति हो जाए, तो ईश्वर ही मालिक है। इससे भी आश्चर्यजनक हाल यह कि सेटिग-गेटिग के आधार पर इन कोचिग सेंटरों पर शिक्षा विभाग या प्रशासन का कोई अंकुश नहीं रह गया है। इस परिस्थिति में हाल ही में गुजरात के सूरत शहर की तरह पुपरी शहर में कभी भी सूरत-ए-हाल हो सकता है। इसके विपरीत शिक्षा विभाग या प्रशासनिक महकमा सजग नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि अनुमंडल में कोचिग सेंटरों के रजिस्ट्रेशन और जांच का निर्देश भी हवा-हवाई बन कर रह गया। अधिकांश कोचिग सेंटर नियम-कानून की धज्जियां उड़ाते रहे हैं। इनका सही रिकॉर्ड न शिक्षा विभाग और न प्रशासन के पास है। फायर विभाग का एनओसी नहीं, विभाग लापरवाह :

अनुमंडल मुख्यालय में एक अनुमान के तहत खासकर नगर पंचायत अंतर्गत डेढ़ दर्जन से अधिक छोटे-बड़े कोचिग सेंटर हैं। यहां चोरौत, नानपुर, बोखड़ा समेत आसपास के ग्रामीण इलाके से छात्र-छात्राएं किराए के मकान या लॉज में रहकर पढ़ते हैं। लेकिन, अधिकांश बिहार कोचिग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। लिहाजा किसी कोचिग संस्थान के पास आग से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे यहां पढ़ने वाले छात्रों की जान खतरे में है। बिहार कोचिग संस्थान एक्ट के मुताबिक बैठने के लिए पर्याप्त जगह, आकस्मिक चिकित्सा सुविधा और पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए। बैठने को छोड़कर शहर के अधिकतर कोचिग में अन्य व्यवस्थाएं नहीं हैं। छात्र-छात्राएं सड़क किनारे साइकिल या वाहन लगाते हैं। इसके कारण राहगीरों की परेशानी बनी रहती है। गली-मुहल्ले तक कोचिग सेंटरों की भरमार :

शहर में गली-मुहल्लों में कोचिग सेंटरों की भरमार है। एक-एक मकान में कई कोचिग सेंटर तक संचालित हो रहे हैं। झझिहट रोड, क्लब रोड, एसबीआई रोड, सिगयाही, बसंत चौक, राजबाग, बाजार समिति रोड में सेंटरों की संख्या बहुतायत है। इनमें कई खपरैल, एस्बेस्टस तो कई पुराने भवन में संचालित है।

खासतौर पर अग्निकांड की स्थिति में पुराने भवनों में चल रहे कोचिग सेंटर से निकलना काफी कठिन है। छात्रों की सुरक्षा के प्रति कोचिग संचालक भी सजग नहीं दिख रहे हैं। उन्हें सिर्फ मोटी कमाई से मतलब है। जागरण की टीम ने कोचिग संस्थानों की पड़ताल की। इनमें कई कोचिग सेंटरों में अग्निशमन यंत्र नही मिला। कई कोचिग सेंटरों में तो संकीर्ण रास्ता होने से परेशानी भी झेलनी पड़ती है। अगर कही ऐसे कोचिग सेंटरों में आग लग गई तो विद्यार्थियों छत से कूदने के सिवा और कोई चारा नहीं बचेगा। इसके लिए शिक्षा विभाग व प्रशासन को दोषी ठहराया जाए तो गलत अतिशयोक्ति नही होगी। समय-समय पर आग से बचाव की नहीं दी जाती जानकारी :

निजी शैक्षणिक संस्थानों का रजिस्ट्रेशन फायर विभाग का एनओसी देखने के बाद ही किया जाता है। लेकिन, कभी भी आग से बचाव की जानकारी नहीं दी जाती है। इसके अलावा अधिकतर कोचिग संस्थान की बनावट बिल्डिग बायलॉज के विपरीत है। वहां इमरजेंसी के दौरान बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ते नहीं। सीढि़यां तक तंग हैं। बाहर से निकलने का कोई रास्ता नहीं है। इस बारे में अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि कोचिग संस्थानों को चिह्नित कर नोटिस भेजा जा रहा है। इसका अनुपालन नहीं करने पर फायर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर जिस तरह से शिक्षा दी जा रही है वह गलत है। यदि कहीं हादसा हो भी जाता है तो सीधा संचालक दोषी होंगे।

Posted By: Jagran

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