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सीतामढ़ी में खाद बीज का अधिकृत विक्रेता बनने का सुनहरा मौका, युवाओं के लिए खुला स्वरोजगार का द्वार

Published: Thu, 27 Aug 2026 04:49 PM (IST)

Agriculture Certificate Course Bihar: सीतामढ़ी में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 15 दिवसीय समेकित पोषण प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया ...और पढ़ें

जिले के युवा खाद और उर्वरक के अधिकृत विक्रेता बनकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। फाइल फोटो

जिले के युवा खाद और उर्वरक के अधिकृत विक्रेता बनकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। फाइल फोटो

HighLights

  1. सीतामढ़ी में 15 दिवसीय समेकित पोषण प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ।

  2. युवाओं को खाद-उर्वरक के अधिकृत विक्रेता बनकर आत्मनिर्भर बनने का अवसर।

  3. मिट्टी की सेहत, जैविक खेती, वर्मीकंपोस्ट निर्माण पर विशेष जोर।

संवाद सहयोगी, पुपरी (सीतामढ़ी)। Fertilizer Dealer Training Sitamarhi: कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में 15 दिवसीय समेकित पोषण प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन स्थानीय विधायक प्रो. नागेंद्र राउत और केवीके के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद जिले के युवा खाद और उर्वरक के अधिकृत विक्रेता बनकर आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

स्वरोजगार का सुनहरा मौका

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि यह प्रशिक्षण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में बेहद प्रभावी कदम है।

वरीय वैज्ञानिक डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने बताया कि जागरूकता की कमी के कारण किसान केवल यूरिया, डीएपी, पोटाश, जिंक और बोरोन का ही अधिक उपयोग करते हैं।

फसलों के संपूर्ण विकास और बेहतर उपज के लिए लगभग 16 से 18 प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिसकी तकनीकी जानकारी प्रशिक्षण में दी जा रही है।

मिट्टी की सेहत सुरक्षा

प्रशिक्षण प्रभारी सह पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. किंकर कुमार ने बताया कि सही जानकारी के अभाव में रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग मिट्टी की उर्वरता को घटाता है और किसानों की लागत बढ़ाता है।
तकनीकी रूप से प्रशिक्षित विक्रेता किसानों को सही मात्रा और सही पोषक तत्वों के चयन की सलाह देकर उनकी लागत कम करा सकेंगे।

उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार ने बताया कि इस 15 दिवसीय सत्र में केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) निर्माण की व्यावहारिक विधि भी सिखाई जाएगी।

जैविक खेती को बढ़ावा

सस्य वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद और पादप रक्षा वैज्ञानिक डॉ. श्रीति मोसेस ने बेहतर उत्पादन के लिए जैव उर्वरकों जैसे एजोटोबैक्टर, नील हरित शैवाल, एजोला, पीएसबी और केएसबी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

गृह वैज्ञानिक डॉ. सलोनी चौहान ने किसानों के लिए नियमित मिट्टी जांच की आवश्यकता बताई, जिससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित इस स्वरोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण शिविर में कुल 45 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।