सीतामढ़ी। जिले में बुधवार को परम्परागत तरीके से हरतालिका यानी तीज का पर्व मनाया गया। अहले सुबह से ही इलाका भक्ति में डूब गया। घर-घर में महिलाओं ने गौरी व शिव की मूर्ति बना परम्परागत तरीके से विधिवत पूजा-अर्चना की। वहीं पुरोहित से कथा सुनी। महिलाओं ने पूरे दिन व रात उपवास रख कर तीज व्रत किया। नए परिधानों व सुहाग का जोड़ा पहन सोलहों श्रृंगार कर भगवान शंकर तथा पार्वती की पूजा-अर्चना कर महिलाओं ने अपने पति के दीर्घायु होने की कामना की। देर रात तक महिलाओं ने मंगल गीत गाए। पर्व को लेकर गांव से शहर तक उत्साह दिखा। बाजारों में भीड़ रही। वहीं पुरोहितों की जबरदस्त डिमांड रहीं। इस पर्व में पुरोहित से कथा सुनने की परम्परा है, लिहाजा पुरोहितों की तलाश में लोग भटकते रहे। एक जगह कथा सुनाने के दौरान पंडितों को कई-कई जगहों से मोबाइल पर कॉल आते रहे।

बताते चलें कि तीज इलाके का एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस पर्व को सबसे पहले गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने किया था। फलस्वरूप भगवान शंकर उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए। इच्छित वर प्राप्ति के लिए पार्वती जी ने तपस्या की। पार्वती माता ने कंदराओं के भीतर शिवजी की रेत की मूर्ति बनाकर उसका पूजन किया। उस दिन भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया थी। माता ने निर्जल व निराहर व्रत करते हुए दिन-रात शिव नाम मंत्र का जाप किया। पार्वती की सच्ची भक्ति व संकल्प की ²ढ़ता से प्रसन्न होकर सदाशिव प्रकट हो गए और उन्होंने उमा को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। तभी से इस व्रत को ¨हदू धर्म की अधिकतर महिलाएं सौभाग्य प्राप्ति के लिए करती हैं।

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कई जगह सामूहिक स्तर पर हुआ पूजन

सीतामढ़ी : पुरोहित की कमी के चलते जिला मुख्यालय डुमरा के कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से तीज का पर्व किया और सामूहिक रूप से कथा सुनी। जिला मुख्यालय डुमरा के वार्ड नंबर तीन, कैलाशपुरी व सीमरा में कई जगह पूजन की सामूहिक तस्वीर दिखी। पुलिस लाइन के पास स्थित भविष्य दर्शन केंद्र में सामूहिक पूर्व से कथा का आयोजन किया गया। यहां पंडित गिरधर गोपाल चौबे द्वारा विधिवत पूजा कराई गई।

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बोली महिलाएं ::

नीरा कुमारी : तीज ¨हदू धर्म और सौभाग्यवती महिलाओं का महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व सभी इलाकों में मनाया जाता है, लेकिन मिथिला में तीज की परम्परा काफी अनूठी है। इस पर्व में व्रती महिलाएं दिन व रातभर निराहार रहकर पूजन करती हैं। कथा सुनती है और सूर्य उदय के बाद शिव-पार्वती का पूजन कर व्रत का पारायण करती हैं।

अर्चना कुमारी : देवी पार्वती ने महादेव को पति के रूप में वरण करने के लिए जंगल में बगैर अन्न जल के कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने पत्नी के रूप में पार्वती को स्वीकार करने का वरदान दिया था। तभी से तीज की परम्परा है। यही वजह है कि सुहागिन महिलाओं द्वारा तीज का व्रत किया जाता है।

वंदना श्रीवास्तव : सौभाग्यवती महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला और निराहार रहकर व्रत करती हैं। तीज का पर्व महिलाओं के अखंड सौभाग्य का पर्व है। ¨हदू धर्म में तीज पर्व का बड़ा महत्व है। इस पर्व में महिलाएं 24 घंटे का उपवास करती हैं। दिन में कथा के बाद रात भर पूजन किया जाता है।

नीलम देवी : यह व्रत सौभाग्यवती महिलाओं का महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत काफी कठिन है। हर स्त्री का सपना होता है कि वह ताउम्र सुहागिन रहे। यही वजह है कि महिलाएं बगैर अन्न-जल के 24 घंटे तक उपवास कर भक्ति में डूब कर माता पार्वती व महादेव की पूजा-अर्चना करती हैं।

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Posted By: Jagran