शेखपुरा में ग्रामीण का बवाल: CO को बनाया बंधक, प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी; पुलिस से झड़प
घाट कुसुंभा को बाढ़ राहत क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर शेखपुरा के ग्रामीणों ने प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी ...और पढ़ें

राजस्व अधिकारी से भी उलझीं महिलाएं
HighLights
घाट कुसुंभा को बाढ़ राहत क्षेत्र घोषित करने की मांग।
ग्रामीणों ने प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी कर सीओ को रोका।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई।
जागरण संवाददाता, शेखपुरा। शेखपुरा के घाट कुसुंभा में बाढ़ राहत क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी के बाद अंचलाधिकारी को मंच पर ही रोक लिया गया। हंगामे के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प की स्थिति बनी।
चार दिन से अनशन, शुक्रवार को फूटा गुस्सा
चार दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू मंडल की मांग के समर्थन में शुक्रवार को ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण घाट कुसुंभा प्रखंड कार्यालय पहुंचे और जमकर हंगामा किया।
ग्रामीणों ने कार्यालय में ताला लगा दिया। इसी दौरान अंचलाधिकारी को भी मंच पर रोककर रखा गया। अचानक बढ़े तनाव के बाद मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को बुलाना पड़ा।
पुलिस पहुंची तो बढ़ा तनाव
हंगामे की सूचना मिलने पर एएसपी डॉ. राकेश कुमार, एसडीओ प्रियंका कुमारी समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने अनशन स्थल पर पहुंचकर पप्पू मंडल और ग्रामीणों से बातचीत शुरू की।
प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों की मांगों को सुना और उनसे लिखित आवेदन लिया। अधिकारियों ने मांग को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू हुई।
राजस्व अधिकारी से भी उलझीं महिलाएं
हंगामे के दौरान राजस्व अधिकारी गुलशन कुमार के साथ भी महिलाओं की उग्रता देखने को मिली। महिलाओं ने उनका कपड़ा पकड़कर गिराने का प्रयास किया।
इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस जवानों के साथ भी हाथापाई जैसी स्थिति बन गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को समझाकर स्थिति शांत कराने का प्रयास किया।
आखिर क्यों भड़के हैं ग्रामीण?
ग्रामीणों की मुख्य मांग घाट कुसुंभा प्रखंड क्षेत्र को बाढ़ राहत क्षेत्र घोषित करने की है। उनका कहना है कि इलाके में हर साल बाढ़ की स्थिति से लोगों को परेशानी होती है।
ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ से प्रभावित होने के बावजूद क्षेत्र को राहत क्षेत्र का दर्जा नहीं मिलने से लोगों को सरकारी राहत का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता है।
पड़ोसी जिले का दिया उदाहरण
ग्रामीणों का कहना है कि उनके इलाके के लोगों को बाढ़ की परेशानी झेलनी पड़ती है, जबकि बगल के लखीसराय जिले के किसानों को राहत का लाभ मिल जाता है। इसी अंतर को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीण चाहते हैं कि घाट कुसुंभा क्षेत्र को भी बाढ़ राहत क्षेत्र घोषित किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों और किसानों को सरकारी सहायता का लाभ मिल सके।
प्रशासन ने दिया सरकार तक बात पहुंचाने का भरोसा
एएसपी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की मांग को सुना गया है और उनकी बात सरकार तक पहुंचाई जाएगी।
लिखित आवेदन लिए जाने और प्रशासन की ओर से आश्वासन दिए जाने के बाद माहौल को सामान्य करने का प्रयास किया गया।
मांग पर फैसला अब सरकार के हाथ में
फिलहाल ग्रामीणों की मांग पर सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। लेकिन घाट कुसुंभा में हुए इस हंगामे ने बाढ़ राहत क्षेत्र घोषित करने की मांग को एक बार फिर सामने ला दिया है।
चार दिनों से चल रहा अनशन शुक्रवार को उस समय बड़े प्रदर्शन में बदल गया, जब ग्रामीणों ने प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी कर दी और अंचलाधिकारी को मंच पर ही रोक दिया।
