शेखपुरा । मंगलवार को दसवीं मुहर्रम पर मातमी जुलूस का आयोजन किया गया। इसमें शिया समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही मुहर्रम संपन्न हो गया। जुलूस में 12-15 साल के किशोर के साथ 60-65 की आयु के वृद्ध भी शामिल हुए। मुहर्रम के इस मातमी जुलूस को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के सख्त बंदोबस्त किये थे। दोपहर बाद यह मातमी जुलूस शहर के तरछा मोहल्ला स्थिति नवाब के इमामबाड़ा से शुरू हुआ और बाद में बड़ी दरगाह स्थित करबला में इसका विसर्जन कर दिया। मातमी जुलूस के पूरे मार्ग तरछा से लेकर बड़ी दरगाह तक मजिस्ट्रेट तथा पुलिस की भारी तैनाती की गई थी। लोगों ने अरबी तथा फारसी भाषा में हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। इस दौरान लोगों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में खुद से खुद को शारीरिक यातनाएं भी दी। लोगों ने जंजीर भी खेली। इस दौरान जुलूस मार्ग पर लोगों ने गुलाब जल का छिड़काव भी किया। बताया गया कि ईमान और इंसानियत के लिए इमाम हुसैन ने अपने पूरे परिवार की शहादत दे दी थी। मुहर्रम इमाम हुसैन की शहादत की याद में ही मनाया जाता है। इसमें शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहनते हैं तथा शोक मनाते हैं।

Posted By: Jagran

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