शेखपुरा। वर्चस्व की लड़ाई में हत्या का शिकार हुआ दशरथ राम को बदमाशों ने शेखपुरा के बुधौली बाजार से अगवा किया था। इस बाबत मिली जानकारी में बताया गया कि मुरारपुर का दशरथ राम अपनी जान पर खतरा भांप कर इधर कुछ दिनों से पानी बेटी के घर घाटकोसुम्भा में रहता था। बताया गया कि बुधवार की शाम दशरथ राम कुछ जरुरी काम से बेटी के घर से शेखपुरा बाजार आया था। बताया गया कि बुधवार की शाम शेखपुरा में अपना जरुरी काम निबटाने के बाद दशरथ राम वापस घाटकोसुम्भा जाने की तैयारी में था। तभी दो बाइक पर सवार बदमाशों ने दशरथ राम को जबरन अपने कब्जे में कर लिया तथा बाइक पर बैठाकर अज्ञात स्थान की तरफ लेकर चला गया। बाद में रात लगभग साढ़े नौ बजे सुनसान गिरिहींड़ा बस स्टैंड पर लाकर उसे गोली मार दिया। दशरथ राम को गोली मारने के बाद बाइक सवार बदमाश वहां से भाग गये।

मुरारपुर में ढाढ़ी समाज के बीच चल रहे वर्चस्व की लड़ाई में हाल के दिनों में यह तीसरी हत्या है। दो साल पहले इसी तरह की घटना में दशरथ राम के बेटे रंजीत राम की भी हत्या कर दी गई थी। रंजीत की हत्या 2016 में होली के दिन मुरारपुर गांव में ही गोली मारकर कर दी गई थी। रंजीत की हत्या से शुरू हुआ यह खूनी खेल अब तक दो सालों में मुरारपुर के तीन लोगों की जान ले चुका है। इसी साल जनवरी में शेखपुरा के जमालपुर में मुरारपुर गांव के ही संतोष राम की हत्या कर दी गई थी। तब कहा गया था कि रंजीत की हत्या का बदला लेने के लिए संतोष की हत्या की गई है । मगर मामला वहीँ तक नहीं रुका। बुधवार की रात रंजीत के पिता दशरथ राम की हत्या को भी इसी खूनी संघर्ष की कड़ी में जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि संतोष की हत्या का बदला लेने के लिए दशरथ राम को मौत का घाट उतारा गया है। बताया गया कि मुरारपुर में ढाढ़ी समाज के दो गुटों के बीच यह खूनी खेल दारु के धंधे को लेकर शुरू हुआ। जानकारी में बताया गया कि मुरारपुर में कुछ ऐसे धंधेबाज हैं जो चुलाई शराब का निर्माण करके उसकी सप्लाई शहर तथा आस-पास के गांवों में धंधेबाजों को करते हैं। इसी धंधे में ग्रहक कब्जाने को लेकर शुरू हुआ यह प्रतिस्पर्धा अब खूनी संघर्ष का रूप धारण कर लिया है।

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