जागरण संवाददाता, शेखपुरा:

किशोरों में तेजी से नशा की आदत बढ़ रही है। यह स्थिति परिवार,समाज और देश के लिए चिता का विषय है। अगर 5-10 वर्षों में इस पर नियंत्रण नहीं हुआ तो भविष्य के लिए यह बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। सिविल सर्जन डा वीरेंद्र कुमार ने बताया कि 14 से 18 साल की आयु के 40 प्रतिशत किशोर नशा की गिरफ्त में हैं। इसमें शहरी क्षेत्रों में पांच से सात प्रतिशत संख्या किशोर उम्र की लड़कियां भी शामिल है। किशोरों में नशे की यह लत बड़ों की देखा-देखी से बढ़ रही है। शेखपुरा में भी सुबह और शाम चाय की दुकानों और सड़कों किनारे कई किशोर सिगरेट पीते दिख जाते हैं।

नशा करने से निकोटिन सीधे मस्तिष्क को प्रभावित होता है। शुरू में आनंद के लिए नशा करते हैं,फिर यह आदत हो जाती है। नशा में सिर्फ शराब ही नहीं सिगरेट,बीड़ी,बीड़ी,तंबाकू,गुटका जैसे पदार्थ शामिल हैं। एक सिगरेट पीने से जीवन के नौ मिनट और एक बीड़ी पीने से जीवन के तीन मिनट कम हो जाते हैं। देश में नशे की वजह से हर सात सेकंड में एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ती है। देश में शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में ही नशा करने वालों की संख्या अधिक आंकी गई है। शहरी क्षेत्र में 25.3 तो ग्रामीण क्षेत्र में 38.4 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार के नशा का सेवन करते हैं। नशा के लिए किशोर विभिन्न तरह के केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं। खाली है नशा मुक्ति केंद्र—

छह साल पहले नशा मुक्ति अभियान को लेकर सदर अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र खुला था। नशा के आदि लोगों जब नशा का साधन नहीं मिलता है तब उनमें मानसिक बेचैनी और शरीर में कंपन होता है। ऐसी स्थिति का सामना करने वाले लोगों के लिए यह केंद्र खोला गया था। शुरू के वर्षों में अच्छी संख्या में मरीज आये,मगर अब यह वार्ड खाली रहता है। लोग वजह बताते हैं-आसानी से शराब और नशा के दूसरे साधन उपलब्ध हो रहे हैं।

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