शिवहर। याद है 10 अगस्त 2017 का दिन..। जब लंबे संघर्ष के बाद कॉलेज विहीन शिवहर जिला को अंगीभूत महाविद्यालय के रुप में डिग्री कॉलेज की स्थापना की गई। उद्घाटन बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति अमरेंद्र नारायण यादव स्थानीय विधायक मो. शर्फुद्दीन सहित अन्य गणमान्यों की मौजूदगी में किया गया। तब ऐसा कहा गया और सच्चाई भी यही थी कि जिले में कॉलेज नहीं होने का धब्बा मिट गया। वहीं जिले के प्रतिभाओं को डिग्री की पढ़ाई के अन्य जिलों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। इसे मू‌र्त्त रुप देने का काम संघर्षशील युवा अधिकार मंच के आदित्य कुमार एवं मुकुंद प्रकाश मिश्र की युवा ब्रिगेड की रही जिसने इसे आंदोलन का रुप दिया। वहीं डिग्री कॉलेज को धरातल पर लाने का श्रेय तत्कालीन डीएम राजकुमार को भी है कि आंदोलन के मर्म को समझा। यहां तक तो ठीक है लेकिन उक्त कॉलेज को नामालूम किसकी बुरी नजर लग गई है कि अस्तित्व में आकर भी अस्तित्व की तलाश है।

- 1268 छात्र छात्राओं ने लिया है नामांकन

जिले में डिग्री कॉलेज खुलते ही नाम लिखाने वालों की भीड़ इकट्ठी हो गई। कला एवं वाणिज्य संकाय के 2017- 20 में 431 नामांकन हुए। वहीं अगले सत्र 2018 - 21में यह संख्या बढ़कर करीब दोगुनी 837 हो गई। फिलवक्त कुल 1268 छात्र/ छात्राएं नामांकित हैं। लेकिन इसे विडंबना कहें या फिर जिले की प्रतिभाओं के साथ भद्दा मजाक ? बीते पौने दो वर्षों से कॉलेज में एक भी प्राध्यापक नहीं हैं।

- नहीं हैं एक भी प्राध्यापक

इस समस्या के वैकल्पिक समाधान के रुप में तत्कालीन डीएम राजकुमार ने स्थानीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों एवं जिले के उच्च योग्यताधारी लोगों की एक टीम बनाकर वर्ग संचालन की व्यवस्था बनाई थी। शुरू में नए जोश के साथ शिक्षा दान की भावना से लोगों ने समय भी दिया लेकिन यह प्रयोग भी दीर्घकालिक नहीं हो सका। यहां यह बताना भी आवश्यक है कि 12 जनवरी 18 को सांसद रमादेवी, सूबे के सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह, विधायक मो. शर्फुद्दीन, विधान पार्षद देवेशचंद्र ठाकुर ने की की उपस्थिति में वर्ग संचालन का शुभारंभ किया गया था।

- दो प्रतिनियुक्त कर्मियों के भरोसे चल रहा डिग्री कॉलेज बहुप्रतीक्षित डिग्री कॉलेज में अभी नबाव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक तौकीर आलम को नामांकन प्रभारी बनाया गया है। वहीं एक अन्य को लिपिक की जिम्मेदारी मिली है। जो सिर्फ नामांकन भर करना जानते हैं। - बिना पढ़े ही छात्र/ छात्राओं ने दी परीक्षा

कॉलेज के नामांकित छात्र/ छात्राओं को बिना वर्ग में पढ़ाई किए परीक्षा देने की मजबूरी है। ऐसे में छात्रों का भविष्य किस ओर जा रहा है यह एक यक्ष प्रश्न है।

- कहां पढ़ेंगे 12 वीं उत्तीर्ण बच्चे

डिग्री कॉलेज होने से यह उम्मीद बढ़ी थी कि गरीब तबके के बच्चों को भी घर से ही डिग्री तक की पढ़ाई हो जाएगी लेकिन यह संभव प्रतीत नहीं होता। वहीं इस वर्ष 12 वीं उत्तीर्ण हजारों छात्र/ छात्राओं के सामने भी नामांकन की समस्या है। डिग्री कॉलेज होकर भी नहीं होने जैसा है। - मिल चुकी है विभागीय स्वीकृति संसाधनों से जूझते अंगीभूत डिग्री कॉलेज शिवहर की बाबत कार्यालय सूत्रों ने बताया कि उक्त कॉलेज को विभागीय स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से पंजीकृत भी हो गया है। मगर जब तक प्राध्यापक सहित अन्य कर्मियों को नियुक्त या प्रतिनियुक्त नहीं किया जाता तब तक जिलावासियों को इस कॉलेज का समुचित लाभ नहीं मिल सकता।

Posted By: Jagran