मुआवजे के पेंच में फंसी शिवहर-सीतामढ़ी विशेष रेलमार्ग परियोजना, लोकसभा में सांसद लवली आनंद ने उठाया मुद्दा
शिवहर-सीतामढ़ी रेलमार्ग परियोजना भू-अर्जन की बाधाओं के कारण धीमी गति से चल रही है, जिसमें 160 एकड़ में से केवल ...और पढ़ें

शिवहर-सीतामढ़ी रेलमार्ग निर्माण में भू-अर्जन बना बड़ी बाधा
HighLights
शिवहर-सीतामढ़ी रेलमार्ग निर्माण भू-अर्जन की बाधाओं से जूझ रहा है।
कुल 160 एकड़ में से 98 एकड़ भूमि का अधिग्रहण हुआ।
बागमती नदी पर पुल निर्माण कार्य भी बाढ़ से बाधित।
जागरण संवाददाता, शिवहर। शिवहर-सीतामढ़ी रेलमार्ग निर्माण की प्रक्रिया तेजी के साथ शुरू हुई, लेकिन धरातल पर निर्माण की रफ्तार धीमी है। निर्माण की राह में अब भी भू-अर्जन की बाधा बरकरार है। स्वीकृति मिलने के तीन साल से अधिक समय बीत चुके है, लेकिन निर्माण के नाम पर बागमती नदी के डुब्बाघाट पुल पर 12 स्पेन वाले 610 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था और बाढ़ की वजह से काम बंद हो गया।
गुवाहाटी की दुर्गा कृष्णा स्टोर नामक एजेंसी द्वारा यहां पुल निर्माण का काम किया जा रहा था। इधर, 12 अगस्त को शिवहर सांसद लवली आनंद ने मामले को लोकसभा में उठाया।
रेल मंत्री द्वारा जवाब में बताया गया कि शिवहर-सीतामढ़ी रेलमार्ग के कुल 160 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें 98 एकड़ का अधिग्रहण हो चुका है। मंत्री ने बताया कि बागमती नदी पर 600 मीटर से अधिक लंबे पुल का निर्माण कराया जा रहा है।
जबकि सामाजिक कार्यकर्ता मुकुंद प्रकाश मिश्रा द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के आलोक में 13 अगस्त को लोक सूचना पदाधिकारी सह जिला भू-अर्जन पदाधिकारी द्वारा बताया गया हैं कि अबतक कुल 215 पंचाटियों का भुगतान हो चुका है। 579 पंचाटियों का लंबित हैं।
बताते चलें कि वर्ष 2007 में मोतिहारी-शिवहर-सीतामढ़ी रेल परियोजना को स्वीकृति मिली थी, लेकिन काम सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाया। सामाजिक कार्यकर्ता मुकुंद प्रकाश मिश्रा ने पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार व रेलवे से जवाब मांगा था। इसी बीच तत्कालीन सांसद रमा देवी ने मार्च 2023 में इस 28 किमी लंबी विशेष रेल परियोजना की स्वीकृति दिलाते हुए 657 करोड़ की राशि भी आवंटित करा दी। पूर्व सांसद ने पुल का विधिवत शिलान्यास भी कर दिया।
इस रेलखंड के निर्माण के लिए कुल 184.61617 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। 28 किमी लंबी शिवहर-सीतामढ़ी रेललाइन में 13 बड़े पुल, 62 पुलिया व छह रोड ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाना है, लेकिन भूमि अधिग्रहण की रफ्तार काफी धीमी है। अबतक महज 338 खेसरा के रैयतों को ही भुगतान किया जा सका है। इस मद में 99 करोड़ 14 लाख 79 हजार 835 रुपये का वितरण किया जा चुका है।
शिवहर जिले में 1015 खेसरा तथा बिहार सरकार की 22 खेसरा सहित कुल 1037 खेसरा का भू -अर्जन होना है। अबतक 338 खेसरा के रैयतों का भुगतान हो चुका है। शेष 677 खेसरा के रैयतों का भुगतान लंबित है।
खेसरा नंबर 144 के रैयतों का भुगतान पूर्ण हो चुका है। खेसरा नंबर 72 के आंशिक रैयतों का भुगतान किया जा चुका है। खेसरा नंबर 122 में बंटवारा सूट, टाइटल सूट व भुगतान पर रोक आदि लगने के कारण लंबित है। जिला प्रशासन द्वारा इसके समाधान के लिए लगातार पहल की जा रही है।
उधर, कुछ रैयतों ने मुआवजे के लिए भूमि की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए मुआवजा लेने से इनकार कर रखा है। इससे संबंधित मामला रेलवे प्राधिकार में लंबित है। मुकुंद प्रकाश मिश्रा बताते हैं कि रेलवे द्वारा आरटीआइ के माध्यम से जनवरी 2027 में परियोजना पूर्ण किए जाने की बात कहीं गई थी, लेकिन वर्तमान में जो स्थिति हैं वह बेहद निराशाजनक हैं।
