शिवहर में बियाडा औद्योगिक क्षेत्र का भविष्य अधर में, किसान नहीं दे रहे अपनी जमीन
Bihar Industrial Development: शिवहर जिले में बियाडा औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना में किसानों द्वारा उपजाऊ जमीन देने से इनकार करने ...और पढ़ें

जिले में बियाडा केंद्र स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकती नजर आ रही है। फाइल फोटो

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संवाद सहयोगी /पंचायत सूत्र, तरियानी / सलेमपुर (शिवहर)। Sheohar Farmers Protest: शिवहर जिले में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए जिला प्रशासन की ओर से भूमि चिह्नित करने और मुआवजा दर तय किए जाने के बाद भी पेंच फंसता दिख रहा है।
तरियानी प्रखंड के चिह्नित गांवों के किसान औद्योगिक विकास के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने को कतई तैयार नहीं हैं। किसानों के इस सख्त रुख के कारण जिले में बियाडा केंद्र स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकती नजर आ रही है।
कैबिनेट से मिली मंजूरी
विदित हो कि बिहार कैबिनेट ने 27 अगस्त 2025 को शिवहर में बियाडा की स्थापना के लिए 105.27 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। इसके अंतर्गत तरियानी प्रखंड के सलेमपुर और बेलाही दुल्लाह गांवों में कुल 270.01 एकड़ भूमि का अधिग्रहण और विकास कार्य किया जाना प्रस्तावित है।
हालांकि प्रशासन द्वारा दर तय करने के बावजूद सलेमपुर, कस्तुरिया और बेलाही दुल्लाह के काश्तकारों ने भूमि देने से साफ मना कर दिया है।
प्रशासन की समझाइश विफल
मामले को सुलझाने के लिए जिलाधिकारी और अपर समाहर्ता ने प्रभावित क्षेत्र के रैयतों के साथ बैठक कर विमर्श किया। बैठक में डीएम ने समझाया कि उद्योग लगने से क्षेत्र का समग्र विकास होगा, युवाओं का पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि औद्योगिक प्रगति से लोग सिर्फ खेती पर आश्रित न रहकर आमदनी के अन्य साधन भी प्राप्त कर सकेंगे।
किसानों की गहरी चिंताएं
प्रशासनिक स्तर पर समझाने की तमाम कोशिशों के बावजूद किसान अपनी जमीन न देने के निर्णय पर पूरी तरह अडिग रहे।
प्रो. राजकुमार राय ने चिंता जताते हुए कहा कि चिह्नित जमीन की चौहद्दी में घनी आबादी बसती है और उद्योग लगने से प्रदूषण बढ़ जाएगा। इससे दिल्ली जैसे महानगरों की तरह स्थानीय लोगों और भावी पीढ़ी का जीवन कष्टकारी हो जाएगा।
नौकरी और पुनर्वास मांग
पैक्स प्रतिनिधि संजय कुमार ने सवाल उठाया कि प्रशासन यह स्पष्ट करे कि प्रभावित परिवारों की आजीविका और विस्थापितों के पुनर्वास का क्या खाका तैयार किया गया है।
उन्होंने मांग रखी कि क्या अधिग्रहण से प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की कोई स्पष्ट योजना बनाई गई है। वहीं स्थानीय किसान बिंदेश्वर महतो का कहना है कि खेती ही उनका मुख्य सहारा है और अन्य कोई तकनीकी हुनर न होने के कारण वे जमीन गंवाना नहीं चाहते।
