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जहां हवन कुंड से प्रकट हुई थीं द्रौपदी और रुकी थी माता सीता की डोली, जानिए शिवहर के उस अद्भुत शिवालय की कहानी

Published: Wed, 12 Aug 2026 03:14 PM (GMT+05:30)

शिवहर के देकुली धाम स्थित बाबा भुवनेश्वर नाथ महादेव मंदिर एक ही पत्थर से तराशा गया एक प्राचीन आस्था का ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है मंदिर।

  2. द्वापर काल से ही लोक आस्था का प्रमुख केंद्र।

  3. सावन में जलाभिषेक से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी।

सुनील कुमार गिरि, शिवहर। शिवहर सीतामढ़ी हाईवे के ठोक किनारे हुव्याघाट के पास देकुली धाम स्थित यावा भुवनेश्वर नाथ महादेव मंदिर लोक आस्था का केंद्र है। यह मंदिर न केवल शिवहर बल्कि विहार, बंगाल, झारखंड और नेपाल के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का केंद्र है।

यहां प्रत्येक रविवार को जलाभिषेक की परंपरा है। यहां जलाभिषेक करने मात्र से हर मन्नत पूरी होती है। महाशिवरात्रि, विवाह पंचमी, वसंतपंचमी, नागपंचमी, नवरात्रि, जानकी नवमी व रामनवमी में भव्य मेला लगता है।

इसके अलावा यहां सावन माह में यहां आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ता है। लाखों लोग यहां जलाभिषेक करते है। है। सालोभर शादी, विवाह, उपनयन व मुंडन आदि संस्कार होते रहते हैं।

एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है मंदिर

बाबा भुवनेश्वर नाथ मंदिर अति प्राचीन है। इस मंदिर का निर्माण द्वापर काल में किया गया था। एक ही पत्थर को तराश कर बनाए गए इस मंदिर में शिल्पकाला और वास्तुकला का अनूठा नमूना मिलता है।

कहा जाता है है कि देकुली धाम में ही हवन कुंड से द्रौपदी उत्पन्न हुई थी। इस मंदिर को लेकर कई किवदंतियां प्रचलित हैं। इस कारण भक्तों की गहरी आस्था इस मंदिर के प्रति है।

इस मंदिर को द्रुपदकालीन भी बताया जाता है। कहते हैं कि अज्ञातवास के दौरान लाक्षागृह में फंसे पांचों पांडव सुरंग के रास्ते यहीं बाहर निकले थे। विशाल टोले पर स्थित इस शिवालय को राजा द्रुपद का किला भी बताते हैं।

मान्यता है कि अयोध्या जाने के क्रम में माता सीता की होली यहां रुकी थी। अद्भुत व अद्वितीय है शिवलिंग यहां स्थापित शिवलिंग अद्भुत व अद्वितीय है। मंदिर का वास्तु अनूठा है।

10 फीट गहरे गर्भगृह में स्थापित बाचा के जलाभिषेक से सभी मनोवांछित फल पूरे होते हैं। कहा जाता है कि यहां सावन में जलाभिषेक से संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती हैं।