शिवहर। मौसम की दरियादिली अब हद पार करने लगी है। बीते 72 घंटों से कभी तेज बारिश तो कभी बूंदाबांदी के दो परिणाम दृष्टिगत हो रहे हैं। एक ओर किसानों को और बारिश की दरकार है। वहीं एक दूसरा वर्ग भी है जो कहने लगा है कि बहुत हुई बारिश अब बस भी करो। यह वर्ग है शहर का अभिजात्य वर्ग। जिसे घर से बाहर निकलते ही कीचड़ या सड़क पर हुए जलजमाव से जूझना पड़ रहा है। बारिश की बात करें तो करीब एक महीने से किसान आकाश की ओर टकटकी लगाए हुए थे कि कब बारिश हो कि खरीफ फसल को आबाद किया जाए। इस बीच एकाध दफा बारिश हुई भी लेकिन वो मानो जलते तवा पर पानी छिटने के समान। नमी को तरसती धरती उस पानी को जल्द ही सोख गई और फिर से पानी के लिए त्राहिमाम की स्थिति रही। लेकिन सोमवार से परिस्थिति किसानों के अनुकूल हो गई है। प्रकृति ने किसानों की अरदास सुन ली है। तभी तो लगातार रहमतों की बारिश हो रही है और किसान अल्लशुबह से शाम तक खेतों में दिख रहे हैं। युद्ध स्तर पर रोपनी कार्य अविराम जारी है। सबसे बड़ी राहत है कि अब पंपसेट से पटवन की भी जरूरत नहीं है। अब सीधे कदवा कर बिचड़ा लगा देना है। एक बात और भी गौरेकाबिल है कि इस बरसात ने ट्रैक्टर की अहमियत बढ़ा दी है। हर किसान ट्रैक्टर मालिक के यहां अपनी हाजिरी देने में लगे हैं ताकि उसकी बारी पहले आ जाए। हल बैल से जुताई कर धान की रोपनी करने वाले किसानों की संख्या नगण्य है। कुल मिलाकर सभी रोपनी अभियान में लगे हैं। किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।

Posted By: Jagran

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