शिवहर, जेएनएन। शनिवार को हिदी दिवस की धूम रही। इस दौरान खासकर कवि एवं साहित्यकारों में विशेष रूप से सक्रियता देखी गई। इस विशेष अवसर पर जिले के साहित्य प्रेमियों की एक गोष्ठी हास्य कवि बैद्यनाथ शाहपुरी की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान पहले चरण हिदी भाषा की उत्पत्ति एवं वर्तमान स्थिति पर परिचर्चा हुई। जिसमें सभी ने अपने उद्गार व्यक्त किए। कहा कि हिदी एक पुरातन और सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है कितु किन्हीं कारणों से इसे वह स्थान प्राप्त नहीं है जिसकी वह हकदार हैं। बावजूद इसके वर्तमान में भाषा समृद्ध हुई है सरकार भी अपने संयंत्र से प्रयत्नशील है कितु हम भारतवासियों को इसमें अपनी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। अंग्रेजी भाषा का अतिशय मैहर अपनी मूल भाषा के लिए घातक सिद्ध न हो इसके प्रति सचेत रहने की जरूरत है। जीवन के हर क्षेत्र में अधिकाधिक हिदी का प्रयोग इसे और भी समुन्नत बनाएगी। इसके पश्चात कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें अधिकांश कवियों की रचनाएं हिदी भाषा पर केंद्रित थी। जिसमें सबने हिदी को भाषाओं की जननी, शब्दों का सागर, सूक्ष्म संवेदनाओं की अभिव्यक्ति में अद्वितीय बताया। वहीं कवयित्री रानी गुप्ता की हास्य कविता लगते हैं ससुर परंतु देवर बताते हैं..आज के बुजुर्ग भी क्या गजब ढाते हैं। पर लोगों ने खूब ठहाके लगाए। मौके पर वरिष्ठ कवि इंद्रदेव तिवारी द्विजदेव, युवा शायर मोहन फतहपुरी, देशबंधु शर्मा एवं नवोदित कवि प्रेम पांडेय सहित अन्य ने अपनी कविताओं का पाठ किया। इधर आरआर कॉलेज में प्राचार्य उमेशनंदन सिंह की अध्यक्षता में हिदी दिवस का आयोजन समारोहपूर्वक किया गया। जहां हिदी को सर्वगुणसंपन्न भाषा बताते हुए अंतरराष्ट्रीय भाषा बनाने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि अकूत शब्द भंडार वाली हिदी भाषा की बराबरी कोई अन्य भाषा कभी नहीं कर सकती। भाषा के उत्थान, वर्तमान स्थिति एवं भविष्य पर मीमांसा की गई। वहीं हिदी भाषा के प्रयोग पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. विजय कुमार महतो ने किया। वहीं प्रो. नवलकिशोर शाही, रामाधार महतो, सीताराम राय, अशोक शाही, हरिशंकर चौधरी, जितेंद्र कुमार सिंह एवं नंदकिशोर सिंह सहित अन्य ने अपने विचार रखे। वहीं दूसरी ओर जिला साहित्य कला संगम जिलाध्यक्ष अजबलाल चौधरी की अध्यक्षता में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिदी साहित्य में कला, संस्कृति, अध्यात्म एवं ज्ञान विज्ञान सभी विरासत के रुप में मौजूद हैं। आज डिजिटल युग में भी हिदी का महत्व कम नहीं है। सरकार को चाहिए कि इसे राष्ट्र भाषा घोषित करे। कार्यक्रम का संचालन सुजीत कुमार ने किया। मौके पर मुख्य अतिथि राकेश राइडर, अधिवक्ता राजेश मिश्र, साधोलाल राय, जगदीश राय, पंकज कुमार, एवं केदार प्रसाद सहित अन्य ने अपने विचार रखे।

Posted By: Jagran

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