शिवहर। अभी मौसम जिस तरह के सितम ढा रहा है अगर हालात नहीं बदले तो किसानों को भारी नुकसान होने का अनुमान है। बीते सप्ताह लगातार दो दिन बारिश क्या हुई किसानों की मानों बांछें खिल आई। लगा कि मौसम की मेहरबानी यूं ही बरकरार रहेगी।लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा। बीते दो तीन दिनों की कड़ी धूप ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। धूप एवं उमस ऐसी कि लोग पसीने पसीने हो रहे हैं। घरों से निकलने से पहले कई दफा सोचना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी क्षति किसानों की हो रही है। एक तो मुकम्मल बिचड़ा तैयार नहीं है। जिन किसानों ने अपने दम पर बिचड़े तैयार किए थे उन्हें खेतों में रोप तो दिया लेकिन धूप ने खेतों की नमी सोख ली है। नतीजतन खेतों में दरारें साफ दिख रही हैं। नवजात धान के पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा जिससे किसान हलकान परेशान हैं। उनके समक्ष उन धान के पौधों को बचाने की चुनौती है वरना खरीफ की फसल से हाथ धोना पड़ सकता है। क्योंकि फिर से बिचड़ा गिराना एवं रोपनी करना असंभव है। ऐसे में इसी जद्दोजहद में किसान अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। पंपसेट की बदौलत अपनी फसल की रक्षा करने में जुटे किसान रह रहकर एक याचक की तरह आसमान निहार रहे हैं।

Posted By: Jagran

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