शिवहर। ठंड ने अपना प्रभाव दिखाना प्रारंभ कर दिया है। हल्की पछुआ हवा क्या चली सुबह में कनकनी ने असर दिखाना शुरु कर दिया। शाम ढ़लते ही चारों तरफ कोहरे की चादर सी फैल जा रही है। लोग शहर से काम निबटा जल्दी घर को लौट जा रहे हैं। नतीजतन शहर खाली सा हो जा रहा है। मौसम सर्द होने के साथ ही गरम कपड़ों की मांग और बिक्री में इजाफा दिख रहा है। शहर में कंबल रजाई एवं तोशक बनने प्रारंभ हो गए हैं। खरीददार अपनी बजट के अनुसार ठंड से बचने का सरंजाम खरीद रहे हैं। इसके साथ ही मॉल एवं रेडिमेड की दुकानों में स्वेटर जैकेट की रेंज ग्राहकों को दिखाया जाने लगा है।

वहीं दूसरी ओर हर चौक चौराहों पर लिट्टी चोखा एवं आमलेट की मौसमी दुकानें सजने लगी हैं। यह अलग बात है कि भीड़ अंडों की दुकान पर ज्यादा दिख रही है।

ग्रामीण इलाकों की बात करें तो वहां भी फेरी लगाने वाले गरम छोटे व्यवसायी गरम कपड़े बेच रहे हैं। फर्क यह दिख रहा है कि कुछ वर्ष पूर्व साइकिल से फेरी लगती थी अब उनके पास बाइक आ गई है। गांवों सूर्यास्त के बाद खलिहानों व सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलना भी प्रारंभ हो गया है जहां चौपाल सजने लगी हैं। जहां इन दिनों पैक्स चुनाव की चर्चा आम है। ठंड से बचने का हो प्रयास

बदलते मौसम के साथ अपने रहन सहन में भी बदलाव लाना आवश्यक है। अगर सचेत नहीं हुए तो फिर परेशानी बढ़ना तय है।

सिविल सर्जन डॉ. धनेश कुमार सिंह ने बताया कि ठंड से प्रभावित होने पर सर्दी, जुकाम, श्वसन संबधी समस्या, ब्लड प्रेशर, वायरल फीवर सहित अन्य बीमारियां हो सकती हैं। खासकर बच्चों को अगर ठंड से नहीं बचाया तो वे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ जाएंगे। सावधान किया कि ठंड को नजरंदाज करना मौत का सबब बन सकती है। इसके लिए नंगे पांव नहीं चलने, गर्म ऊनी कपड़ों का प्रयोग एवं गरम खाना खाने की सलाह दी। कहा कि ठंड में हालांकि पाचन शक्ति बढ़ जाती है। हरी सब्जियां भी प्रचुर मात्रा में मिलती है जिसका खुलकर प्रयोग किया जाना चाहिए।

Posted By: Jagran

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