शिवहर। कहने को जिला में सदर अस्पताल हैं लेकिन मरीजों को समुचित इलाज के लिए आज भी निजी क्लिनिक एवं जांच घर का ही सहारा है। अगर स्थिति थोड़ी भी गड़बड़ हुई तो फिर एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर का चक्कर लगना तय है। नतीजा है कि बीमार मरीज का दोहरा शोषण हो रहा है। यहां अधिकांश मरीज मुफ्त एवं सस्ता इलाज के लिए पहले सरकारी अस्पताल में पहुंचते हैं जहां उन्हें डॉक्टर तो मिलते हैं लेकिन दवा, जांच इत्यादि के लिए जेब ढ़ीली करनी ही पड़ती है। बाद में सुधार न होने पर निजी क्लिनिकों की शरण में जाते हैं जहां महंगे इलाज एवं महंगी दवाईयां खरीदने में दम निकल जाता है। वहीं जब जेब खाली होने लगता है और मरीज की हालत बिगड़ने लगती है तब एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर आखिरी ठिकाना होता है। जहाँ से ठीक होकर लौटना भगवान की मर्जी पर निर्भर करता है क्योंकि तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। यह निम्न एवं मध्यम वर्ग के लोगों की सच्चाई है।

- शहर में मौजूद हैं दो सदर अस्पताल

कहने को तो शिवहर में दो मुख्य अस्पताल हैं एक सदर अस्पताल एवं दूसरा सौ शय्या वाला सरोजा सीताराम सदर अस्पताल। लेकिन दोनों ही जगह अल्ट्रासाऊंड की सुविधा नहीं है। सौ शय्या वाले अस्पताल में तो एक्स- रे सुविधा भी बाधित है। वहीं पुराने सदर अस्पताल में रोगी कल्याण समिति द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किसी तरह एक्स- रे कराया जा रहा है। ऐसे हालात में त्वरित एवं मुकम्मल इलाज की उम्मीद करना मूर्खता कही जाएगी।

स्वास्थ्य सुविधाओं का आंकलन करें तो जिले में विकास के सभी दावे झूठे साबित होते हैं। किसी बड़ी दुर्घटना के बाद मरीजों को आपातकाल में खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है लेकिन जिला शिवहर में यह सुविधा नहीं है। जिले में कागज के रुपये जमा करने को दर्जनों बैंक हैं लेकिन शरीर की धमनियों में बहनेवाले जीवन रक्षक ब्लड का बैंक नहीं है। नतीजतन उस तरह के मरीज जिसे तत्काल ब्लड देने की जरुरत पड़ती है उसे एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर रेफर किया जाता है जिसमें करीब आधे मरीज रास्ते में दम तोड़ जाते हैं। यह एक विडंबना ही है कि जिला बनने के 24 वर्षों के बाद भी यहाँ बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है।

Posted By: Jagran

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