शिवहर। शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन बारिश का कहर जारी रहा। एक सप्ताह पूर्व जहां बारिश के लिए लोग लालायित थे। जब बारिश शुरू हुई तो यह परेशानी का सबब बन गई है। शहर हो या गांव जलजमाव एवं सड़कों पर फैले कीचड़ ने मानो चक्का जाम कर दिया है। सूनी सड़कें देख यूं लगता है जैसे अघोषित क‌र्फ्यू लगी हो। इधर बारिश के बाद उफनाई बागमती जिसका प्राचीन नाम व्याघ्रमती ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है जो तीन दिनों से निर्धारित खतरे के निशान से नीचे उतरने का नाम नहीं ले रही। आज भी जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। प्रतिनियुक्त कर्मी देवेंद्र भारती ने बताया कि फिलवक्त बागमती नदी का जलस्तर 62.76 है जबकि लाल निशान का मानक 61.28 है। अर्थात 1.48 मीटर की वृद्धि साफ दिख रही है। निचले क्षेत्रों में फैला बाढ़ का पानी जलस्तर में वृद्धि होने से स्लुइस गेट होकर बाढ़ का पानी निचले क्षेत्रों में फैलना प्रारंभ हो गया है। नतीजतन कई गांव बाढ़ कि जद में आ गए हैं। कितनों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कई बेघरों ने पड़ोसियों के घर शरण ली है। वहीं हाल ही में रोपे गए धान की फसल के नुकसान होने का डर भी किसानों को सताने लगा है। फलत: किसान के अरमानों पर भी पानी फिरता दिख रहा है। हर कोई वाकिफ हैं कि कितनी मशक्कत के बाद किसानों ने धान की रोपनी की थी व अच्छी फसल की उम्मीद पाल रखी थी। अब सारी उम्मीदें पानी में डूबती दिख रही है। एनएच 104 पर चढ़ा बाढ़ का पानी शुक्रवार की शाम शिवहर- सीतामढ़ी पथ 104 पर कोला पुल के पास बाढ़ का पानी चढ़ गया। सनद रहे कि तीन दिनों से उक्त पथ पर कीचड़ की वजह से आवागमन अवरूद्ध था जहां अब बाढ़ का पानी बढ़ते क्रम में है। ऐसे में सीतामढ़ी से संपर्क भंग हो गया है। एसएच 54 पर भी मीलों तक बाढ़ का पानी शिवहर - मोतिहारी पथ जिसे एसएच 54 का दर्जा हासिल है पर बाढ़ का पानी चढ़ गया है। करीब तीन किलोमीटर तक की सड़क बाढ़ की जद में है। वहीं बागमती पुरानी धार में भी बाढ़ का पानी भरना प्रारंभ हो गया है। उक्त धार जिले के पश्चिम एवं दक्षिण हिस्से से गुजरती है। शहर में हर तरफ पानी ही पानी लगातार बारिश से मुख्यालय की स्थिति बदतर हो गई है। दर्जनों जगह पर जलजमाव है वहीं गलियां कीचड़मय हो गई हैं। वहीं कई दफ्तरों में बारिश का पानी घुस गया है। पिपराही रोड स्थित मातृ-शिशु अस्पताल, नगर थाना, किसान भवन जिसमें करीब आधा दर्जन कार्यालय संचालित है पहुंचने के लिए करीब दो फीट पानी से होकर जाना पड़ रहा है। जबकि किसान मैदान तो पूरी तरह पोखर में तब्दील हो गया है। जिसका पानी निकलने में हफ्तों का समय लगेगा। कुल मिलाकर उपर से बारिश का पानी एवं नीचे से फैल रहा बागमती नदी का पानी जिलावासियों के लिए दोहरे संकट से कम नहीं है।

Posted By: Jagran

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