गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की जद में शिवहर का धनकौल बाजार, जमीन की प्रकृति बदलने से रैयतों में आक्रोश
शिवहर में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण से किसान आक्रोशित हैं। भूमि की प्रकृति गलत तय करने और कम मुआवजा मिलने से वे आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

एक्सप्रेसवे की प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
भूमि की प्रकृति गलत तय होने से किसान आक्रोशित।
पेट्रोल पंप, मार्केट की जमीन को आवासीय बताया गया।
पुराने दर पर मुआवजा मिलने से किसान नाखुश।
जागरण संवाददाता, शिवहर। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि की प्रकृति व रेट तय किए जाने के बाद रैयतों का आक्रोश सामने आ रहा है। भूमि की प्रकृति तय करने में जहां गड़बड़ी सामने आई है वहीं कम कीमत तय किए जाने से किसान आक्रोशित है।
साथ ही आंदोलन की तैयारी कर रहे है। दरअसल, भूमि की प्रकृति तय करने में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। पेट्रोल पंप और मार्केट काम्प्लेक्स की जमीन को आवासीय बना दिया गया है।
वहीं शहरी क्षेत्र की जमीन को खेतिहर बताकर कम कीमत तय की गई है। मामले को लेकर दावा आपत्ति की तय तिथि दो सितंबर तक लोगों ने अपना दावा व आपत्ति दाखिल किया है। वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने अधिकारियों को आवेदन देकर अधिगृहित भूमि का सही मुआवजा देने की मांग की हैं।
जिला भू- अर्जन पदाधिकारी ने बताया कि लोगों के दावा व आपत्तियों का नियमानुसार शीघ्र निष्पादन किया जाएगा। दरअसल, भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत शिवहर जिले की 12 गांवों से गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे गुजरेगा।
शिवहर में इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई होगी 15.9 किमी होगी। इसके लिए कुल 127.7538 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। प्रशासनिक टीम द्वारा निरीक्षण किए जाने के बाद भूमि की प्रकृति और कीमत तय कर दी गई है।
रेलवे की तरह इस एक्सप्रेसवे के लिए भी आवासीय जमीन को खेतिहर और व्यवसायिक जमीन को आवासीय बता दिया गया है। दूसरी ओर कीमत तय करने में भी गड़बड़ी की गई है। इतना ही नहीं जमीन का दर पुराने दर पर तय किया गया है। जबकि वर्तमान दर शहरी क्षेत्र में दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र में 1.6 गुना हो गया है।
पेट्रोल पंप और व्यवसायिक इलाके को बताया आवासीय भूमि
शहर के वार्ड सात निवासी राजकिशोर चौधरी कुल 119 डिसमिल जमीन हैं। रसीदपुर थाना संख्या 152, वार्ड चार में खाता संख्या 40, खेसरा संख्या 271 रकवा 41 डिसमिल, खेसरा संख्या 272 में 54 डिसमिल व 273 में 24 डिसमिल जमीन हैं जो पूरी तरह व्यवसायिक है।
इसमें नोवोकाे कंपनी का गोदाम है। इसका किराया भूमि मालिक को मिलता है। इस भूखंड पर सत्यम पेट्रोल पंप नामक पेट्रोल पंप है। तत्काल एक विवाह भवन का निर्माण कराया जा रहा था। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है।
तीनों खेसरा की जमीन व्यवसायिक होने के बाद भी इसे आवासीय बता दिया गया है। मामले को लेकर भूमि के मालिक राज किशोर चौधरी ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को आवेदन देकर अधिसूचित भूमि का सही मुआवजा देने की मांग की हैं।
शहरी क्षेत्र की जमीन को बताया ग्रामीण क्षेत्र
खैरवा दर्प पंचायत के कुछ गांवों को वर्ष 2021 में नगर परिषद में शामिल किया गया था। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आरटीआइ के जवाब में कहा था कि ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में शामिल इलाकों की भूमि अधिगृहित करने पर शहरी क्षेत्र के दर के अनुसार मुआवजे का भुगतान किया जाएगा। लेकिन खैरवा दर्प वार्ड 13 की जमीन का आकलन ग्रामीण क्षेत्र के आधार पर किया गया हैं।
मामले को लेकर आलोक कुमार सिंह, सत्येंद्र नारायण सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, उदय शंकर सिंह, हरिकिशोर सिंह, चंदेश्वर सिंह, घनश्याम कुमार, योगेंद्र प्रसाद, बैजू सिंह, मिथिलेश देवी, चंद्रभूषण प्रसाद, पुरुषोत्तम कुमार व राम संजीवन सिंह आदि ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को आवेदन देकर जमीन की सही कीमत तय करने की मांग की है।
ऐतिहासिक धनकौल बाजार के अस्तित्व पर संकट
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए अधिगृहित करने के लिए जारी अधिसूचना के बाद पिपराही प्रखंड के ऐतिहासिक व सबसे बड़े बाजार के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। पूर्व में इस बाजार का बड़ा हिस्सा सीतामढ़ी -शिवहर रेलमार्ग के लिए अधिगृहित हो चुका है।
धनकौल बाजार अंग्रेजों के जमाने से लग रहा हैं।यह उत्तर बिहार की प्रमुख अनाज मंडियों में से एक हैं। दिसंबर 2025 में किए गए सर्वे में धनकौल बाजार का हिस्सा इस एक्सप्रेस वे से बच गया था।
लेकिन जून महीने में मालवीय इंफ्रा एजेंसी द्वारा किए गए सर्वे में बाजार का अधिकांश हिस्सा, मार्केट काम्पलेक्स, आवासीय क्षेत्र व बागवानी इसकी जद में आ गया है। मामले को लेकर लोगों ने केंद्रीय मंत्री, सड़क एवं राजमार्ग नितीन गडकरी को आवेदन देकर दिसंबर 2025 के सर्वे के आधार पर ही रूट तय करने की मांग की है।
