छपरा। सारण ही नहीं प्रदेश के लिए यह गौरव की बात है। छपरा के लाल युवा वैज्ञानिक शिवेंदु रंजन ने 26 वर्ष की उम्र में विज्ञान एवं शोध की छह पुस्तकें लिखकर दुनिया के शैक्षणिक मानचित्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई हैं। शहर के सांढा आवास बोर्ड (उमा नगर) निवासी अधिवक्ता सह विधि मंडल महासचिव रविरंजन ¨सह एवं शिक्षिका माधुरी ¨सह के पुत्र शिवेंदु रंजन ने सस्टेनेबल एग्रिक्लचरल रिव्यू पर शोध कर पुस्तक लिखी है। जिसकी सराहना अमेरिका के एमआइटी सहित विश्व के कई देशों में हुई है। इतना ही नहीं एमआइटी व देश के कई देशों के पुस्तकालय में इनकी किताबें रखी गई हैं। जिसके कारण अलग-अलग देशों के साइंटिफिक प्रकाशकों में एडिटर और साथ ही एन्विरोंमेंटल केमिस्ट्री लेटर्स में बतौर एसोसिएट एडिटर भी मनोनीत किया है।

वे भारत के सबसे युवा वैज्ञानिक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। दुनिया के वैज्ञानिकों में इनकी जर्नल ने खासी जगह बनाई है। उसे अमेरिका व जर्मनी से प्रकाशित किया गया है। इन जर्नल केमिस्ट्री, फिजिक्स, मटेरियल साइंस, बायोलॉजिकल साइंस से जुड़े पेपर प्रकाशित किया गया है। इतना ही नहीं शिवेन्दु को नौनो तकनीकी का इनावेटिव रिसर्च फील्ड में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। वे नैनो तकनीकी का इनोवेटिव रिसर्च -एनवायरमेंट, फूड, एग्रीकल्चर और ड्रग के लिए जाना जाता है। अब तक इनकी दस किताबों के लिए उन्होंने अनुबंध किया है। जिसमें वे जीव विज्ञान विषय में नैनो के प्रयोग को उजागर करेंगे। उन्हें कई संस्थाओं ने सम्मानित किया है। यूएसए के एल्सेविएर ने एडवाइजरी बोर्ड के लिए भी मनोनीत किया। शिवेंदु ने दूरभाष पर बताया कि वे भारत में ऐसा फाउंडेशन बनाना चाहते हैं जहां छोटे शहर एवं कस्बे के युवा अपनी प्रतिभा दिखा सके और अपनी क्षमता विश्व पटल पर प्रदर्शित कर सके। इस दिशा में वे कार्य कर रहे है।

Posted By: Jagran