सारण के बाबा मकेश्वर नाथ मंदिर में लकड़ी के शिवलिंग की होती है पूजा, 52 साल पहले झक्कड़ बाबा ने की थी स्थापना
सारण के मकेर बाजार स्थित 52 वर्ष पुराने बाबा मकेश्वर नाथ शिव मंदिर में लकड़ी के शिवलिंग की पूजा होती ...और पढ़ें

बाबा मकेश्वर नाथ शिव मंदिर। फोटो जागरण
HighLights
मकेर बाजार, सारण में 52 वर्ष पुराना बाबा मकेश्वर नाथ मंदिर।
संत झक्कड़ बाबा ने स्थापित किया लकड़ी का अनोखा शिवलिंग।
सावन, कार्तिक में भक्तों की मनोकामना पूर्ति का प्रमुख केंद्र।
जागरण संवाददाता, सारण। नारायणी नदी के पावन तट से करीब दो किलोमीटर दक्षिण मकेर बाजार में स्थित बाबा मकेश्वर नाथ शिव मंदिर श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। करीब 52 वर्ष पुराने इस शिवालय में स्थापित शिवलिंग के प्रति स्थानीय लोगों के साथ आसपास के गांवों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है।
भक्त यहां भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। सावन के महीने में नारायणी नदी से जल लेकर श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करते हैं। इससे पूरे सावन, खासकर सोमवार को मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है।
मंदिर का इतिहास
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 52 वर्ष पहले वर्तमान मंदिर स्थल पर जंगल और झाड़ियां थीं। इसी दौरान संत झक्कड़ बाबा यहां पहुंचे और साधना शुरू की। उन्होंने यहां शिव मंदिर स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की।
उनकी मुलाकात भाथा गांव निवासी भोला सिंह से हुई। इसके बाद दोनों ने जंगल साफ कर वहां लकड़ी का शिवलिंग स्थापित किया और लकड़ी से ही छोटा मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
वर्ष 1974 में स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर के पक्के निर्माण की पहल हुई। निर्माण की जानकारी मिलने पर तत्कालीन परसा अंचल के अंचल अधिकारी जांच के लिए पहुंचे।
बुजुर्गों के अनुसार, झक्कड़ बाबा और भोला सिंह के आग्रह के बाद मंदिर निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने की स्वीकृति मिली। इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ा।
दौलतगंज, छपरा निवासी दुकानदार झूलासी साह और उनकी पत्नी महेश्वरी देवी ने निजी कोष से मंदिर निर्माण में विशेष सहयोग दिया। इसके बाद एक मंजिला मंदिर बनकर तैयार हुआ।
मंदिर की विशेषता
मंदिर की स्थापना से जुड़ी सबसे खास बात यहां लकड़ी के शिवलिंग की पूजा से जुड़ी है। मंदिर निर्माण के दो वर्ष बाद माघ पूर्णिमा के अवसर पर अष्टयाम की शुरुआत हुई, जो आज तक जारी है।
मंदिर परिसर में भगवान शिव के अलावा मां दुर्गा और बजरंग बली के मंदिर भी स्थापित हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा मकेश्वर नाथ की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। सावन के साथ कार्तिक मास, दशहरा, ज्येष्ठ पूर्णिमा सहित अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर भी यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
मंदिर जाने का रास्ता
छपरा-मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग से रेवाघाट स्थित नारायणी नदी के तट तक पहुंचने के बाद वहां से करीब दो किलोमीटर दक्षिण जाने पर मकेर बाजार स्थित सब्जी मंडी परिसर में बाबा मकेश्वर नाथ शिव मंदिर पहुंचा जा सकता है। मुख्य मार्ग से जुड़ा होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक पहुंचना आसान है।
मंदिर में सालभर श्रद्धालु पहुंचते हैं। मकेर प्रखंड के अलावा आसपास के प्रखंडों, जिला मुख्यालय और पड़ोसी मुजफ्फरपुर जिले से भी भक्त मनोकामना लेकर आते हैं। सावन, कार्तिक, दशहरा और ज्येष्ठ पूर्णिमा सहित विशेष तिथियों पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। -विनोद मिश्रा, पुजारी
बाबा मकेश्वर नाथ मंदिर अब केवल मकेर तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों और दूसरे जिलों में भी इसकी पहचान बनी है। बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर के विस्तार और धर्मशाला निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। -शशि साह, ग्रामीण
