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Saran Weather: मानसून की पहली फुहार से किसानों को राहत, अच्छी बारिश का अब भी इंतजार

Published: Mon, 29 Jun 2026 01:21 PM (GMT+05:30)

सारण जिले में मानसून की पहली बारिश ने किसानों और आम लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, जिससे ...और पढ़ें

मानसून की पहली फुहार से किसानों को राहत, अच्छी बारिश का अब भी इंतजार

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जागरण टीम, छपरा। आर्द्रा नक्षत्र की शुरुआत के बाद सोमवार को हुई मानसून की पहली बारिश ने सारण जिले के किसानों और आम लोगों को राहत तो दी, लेकिन खेती के लिए अभी भी अच्छी और लगातार वर्षा की जरूरत बनी हुई है।

पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण धान की नर्सरी तैयार करने वाले किसान चिंतित थे। कई खेतों में नमी की कमी से दरारें पड़ने लगी थीं और धान, मक्का, अरहर सहित अन्य खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही थी।

जलालपुर प्रखंड के भटकेशरी क्षेत्र में बारिश के बाद किसानों ने धान का बिचड़ा डालने और खेत तैयार करने का काम तेज कर दिया। बाजारों में धान बीज की खरीदारी भी बढ़ गई।

हालांकि, किसानों का कहना है कि हुई वर्षा इतनी नहीं थी कि खेतों में पर्याप्त पानी जमा हो सके या सूखे खेतों की दरारें पूरी तरह भर जाएं। जिन किसानों ने पहले से बिचड़ा डाल रखा था, उन्हें कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन रोपनी के लिए अभी और बारिश की आवश्यकता है।

रसूलपुर और आसपास के इलाकों में भी बारिश से मक्का, अरहर, बाजरा और ज्वार जैसी फसलों को जीवनदान मिला है। किसानों का कहना है कि यदि एक-दो दिन और बारिश नहीं होती तो कई फसलों को नुकसान पहुंच सकता था। जिन किसानों ने पहले ही बुआई कर दी थी, उनके लिए यह वर्षा संजीवनी साबित हुई है।

बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहा। कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों ने भी राहत महसूस की। रसूलपुर बाजार समेत विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं ने बारिश में भीगकर मानसून का स्वागत किया। लोगों ने कहा कि मौसम सुहावना होने से जनजीवन में राहत मिली है।

कृषि जानकारों के अनुसार सारण में मानसून की गतिविधियां अब धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। यदि जुलाई के पहले पखवाड़े में नियमित और अच्छी वर्षा होती है तो धान की रोपनी समय पर पूरी हो सकेगी। वहीं, पर्याप्त बारिश नहीं होने की स्थिति में किसानों को सिंचाई पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

फिलहाल पहली फुहार ने उम्मीद जगाई है, लेकिन जिले के किसान अब भी ऐसी बारिश का इंतजार कर रहे हैं जिससे खेतों में पर्याप्त पानी भर सके और खरीफ खेती पूरी रफ्तार पकड़ सके।