बाढ़ से बेहाल सारण: अपनों को अंतिम विदाई देने के लिए भी नहीं मिली जगह, NH-19 किनारे जलीं चिताएं
सारण में गंगा और गंडक नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, जिससे श्मशान घाट ...और पढ़ें

सारण में एनएच किनारे हो रही अंत्येष्टि। जागरण
HighLights
सारण में बाढ़ से श्मशान घाट पानी में डूबे।
एनएच-19 के किनारे शवों का दाह संस्कार हो रहा।
बाढ़ प्रभावित लोग मवेशियों संग सड़क पर शरण लिए।
जागरण टीम, गड़खा/मढ़ौरा। सारण में बाढ़ की स्थिति लगातार विकराल होती जा रही है। बाढ़ का पानी अब लोगों के घर-द्वार और खेत-खलिहान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अंतिम संस्कार की जगह भी छीनने लगा है।
गंगा और गंडक नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण कई श्मशान घाट पानी में डूब गए हैं। ऐसे में मृतकों के स्वजन को अंतिम संस्कार के लिए भी सुरक्षित जगह नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में लोग सड़क किनारे शवों का दाह संस्कार करने को विवश हैं।
गड़खा क्षेत्र में बाढ़ का पानी एनएच-19 तक पहुंच गया है। इससे दक्षिणी इलाके में स्थिति गंभीर हो गई है। बाढ़ से घिरे गांवों के कई श्मशान स्थल जलमग्न हो चुके हैं।
किसी व्यक्ति की मौत होने पर स्वजन को अंतिम संस्कार के लिए दूर-दराज के स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है। कई जगह तो एनएच-19 के किनारे ही चिता जलाने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
बोधा छपरा के समीप सड़क किनारे जलीं चिताएं
अवतारनगर थाना से आगे बोधा छपरा के समीप हाजीपुर-छपरा एनएच-19 के किनारे शुक्रवार को कई चिताएं जलती नजर आईं। बाढ़ से प्रभावित अवतारनगर, दिघवारा, दरियापुर, परसा और गड़खा क्षेत्र से लोग शव लेकर यहां पहुंचे थे।
सड़क की एक ओर अंतिम संस्कार किया जा रहा था, जबकि दूसरी ओर तेज रफ्तार वाहनों का आवागमन जारी था। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रही।
लोगों का कहना था कि बाढ़ के कारण जब गांव के आसपास के श्मशान घाट पानी में डूब गए हैं तो अंतिम संस्कार के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बची है। मजबूरी में सड़क किनारे चिता जलानी पड़ रही है।
एनएच-19 बना शरणस्थली, मवेशियों के साथ रह रहे लोग
बाढ़ का पानी तेजी से फैलने के कारण दक्षिणी इलाके के बड़ी संख्या में लोगों ने एनएच-19 को सुरक्षित शरणस्थली बना लिया है। हाईवे की दक्षिणी लेन और डिवाइडर के आसपास लोग अपने मवेशियों के साथ डेरा डाले हुए हैं।
इससे हाईवे पर वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। एक ओर लोग बाढ़ से बचने के लिए सड़क पर शरण लिए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर उसी सड़क से तेज रफ्तार वाहनों का परिचालन हो रहा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। घरों में पानी घुसने के बाद कई परिवार जरूरी सामान और मवेशियों के साथ सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं।
स्कूलों में घुसा पानी, पठन-पाठन ठप
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। क्षेत्र के अधिकांश सरकारी और निजी विद्यालयों में पानी प्रवेश कर चुका है। जिन विद्यालयों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है, उनके आसपास के इलाकों में बाढ़ की स्थिति के कारण पठन-पाठन स्वत: बंद हो गया है। विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए विद्यालय पहुंचना मुश्किल हो गया है।
