विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बेटे का शव ले जाने को नहीं मिला वाहन, सारण में बेबस पिता ने ठेले पर लादा जिगर का टुकड़ा; ले गए शमसान

Published: Tue, 13 Oct 2026 03:51 PM (IST)

छपरा में पोस्टमार्टम के बाद शव वाहन न मिलने पर एक परिवार को मजबूरन अपने बेटे का शव ठेले पर ...और पढ़ें

ठेले पर शव रखकर ले जाने की आई नौबत

ठेले पर शव रखकर ले जाने की आई नौबत

HighLights

  1. छपरा में शव वाहन न मिलने से परिवार परेशान।

  2. बेटे का शव ठेले पर रखकर घर ले जाना पड़ा।

  3. स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, जांच के आदेश।

जागरण संवाददाता, छपरा(सारण)। स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता को कठघरे में खड़ा करने वाली घटना छपरा में सामने आई है। पोस्टमार्टम के बाद शव घर ले जाने के लिए वाहन नहीं मिला तो मृतक के स्वजन को ठेले का सहारा लेना पड़ा।

जिस समय परिवार को सहारे और संवेदनशीलता की जरूरत थी, उस वक्त शव वाहन नहीं मिलने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ठेले पर शव ले जाने की तस्वीर ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दो दिन से लापता युवक का सरयू नदी में मिला शव

मामला रिविलगंज थाना क्षेत्र के दिलिया रहीमपुर स्थित सरयू नदी का है। दो दिन पूर्व नहाने के दौरान एक युवक नदी में डूब गया था।

उसकी तलाश में एसडीआरएफ की टीम लगातार जुटी हुई थी। मंगलवार को युवक का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान नगर थाना क्षेत्र के करीमचक मोहल्ला निवासी सनी कुमार के रूप में हुई। शव मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया।

102 शव वाहन के लिए फोन, फिर भी नहीं मिली मदद

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वजन शव को घर ले जाने के लिए 102 शव वाहन की व्यवस्था कराने में जुटे। इसके लिए कंट्रोल रूम में फोन भी किया गया।

हालांकि, स्वजन का आरोप है कि संपर्क करने के बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला और वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। ऐसे मुश्किल वक्त में जब परिवार को शव ले जाने के लिए मदद की जरूरत थी, तब उन्हें खुद ही इंतजाम करना पड़ा।

ठेले पर शव रखकर ले जाने की आई नौबत

शव वाहन नहीं मिलने के बाद स्वजन के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। मजबूर होकर उन्होंने शव को ठेले पर रखा और बांधकर घर की ओर ले गए।

इस घटना ने जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और शव वाहन की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह जांच का विषय है कि सूचना देने के बावजूद वाहन क्यों नहीं पहुंचा और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।

अस्पताल प्रबंधन ने जांच कराने की कही बात

इस मामले में सदर अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि पोस्टमार्टम कर्मी की ओर से ही शव वाहन उपलब्ध कराया जाता है।

वाहन क्यों नहीं मिला, इसकी जांच कराई जाएगी। वहीं, एंबुलेंस सेवा के एसीओ सत्य प्रकाश ने कहा कि स्वजन की ओर से उनके मोबाइल पर इस संबंध में कोई फोन नहीं आया था। उनके अनुसार, फोन आने पर शव वाहन उपलब्ध कराया जाता और एंबुलेंस सेवा 24 घंटे संचालित रहती है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी चूक की वजह

अस्पताल प्रबंधन और एंबुलेंस सेवा के अधिकारी के बयानों में अंतर सामने आया है। स्वजन जहां फोन करने के बावजूद मदद नहीं मिलने की बात कह रहे हैं, वहीं एसीओ ने अपने मोबाइल पर फोन नहीं आने की बात कही है।

ऐसे में यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि शव वाहन उपलब्ध कराने में देरी या चूक कैसे हुई। फिलहाल, पोस्टमार्टम के बाद शव को ठेले पर ले जाने की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।