संघर्ष, संकल्प और सफलता की कहानी: जीविका से मिली ताकत, बेटी बनी वर्दीधारी
अमनौर प्रखंड की रेणु देवी ने सीमित संसाधनों और सामाजिक दबावों के बावजूद जीविका से जुड़कर अपने जीवन की दिशा ...और पढ़ें

संघर्ष, संकल्प और सफलता की कहानी: जीविका से मिली ताकत, बेटी बनी वर्दीधारी

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प्रवीण, छपरा। ग्रामीण बिहार में महिला सशक्तीकरण और सामाजिक बदलाव की जो सकारात्मक तस्वीर उभर रही है, उसकी सशक्त मिसाल अमनौर प्रखंड की रेणु देवी हैं। सीमित संसाधनों, सामाजिक दबावों और पारिवारिक संघर्षों के बावजूद उन्होंने जिस साहस और संकल्प के साथ अपने जीवन की दिशा बदली, वह आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गई है।
अमनौर प्रखंड के धर्मपुर जाफर पंचायत की निवासी रेणु देवी बागेश्वरी जीविका महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। अल्प आयु में विवाह के कारण उनकी शिक्षा बाधित हो गई थी। विवाह के बाद कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की।
इसी दौरान उनकी पहली संतान के रूप में पुत्री का जन्म हुआ। पुत्री के जन्म पर समाज के कुछ वर्गों द्वारा किए गए कटाक्ष और उपेक्षा ने उन्हें भीतर तक आहत किया, लेकिन इसी पीड़ा से उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपनी बेटी को ऐसा भविष्य देंगी, जिस पर पूरा समाज गर्व करेगा।
जीविका से जुड़ाव ने बदली आर्थिक और सामाजिक स्थिति
वर्ष 2014 में रेणु देवी का जुड़ाव जीविका परियोजना से हुआ, जो उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। जीविका के माध्यम से उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जागरूकता भी विकसित हुई। बाद में उन्होंने सामुदायिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई और परिवार के लिए बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनीं।
वर्ष 2021 में जीविका के माध्यम से उन्हें 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने अपने पति के लिए साइकिल मरम्मत की दुकान की शुरुआत कराई, जिससे परिवार की आमदनी में स्थायित्व आया। साथ ही उन्होंने अपनी पुत्री अदिति कोमल की पढ़ाई और पटना में तैयारी की व्यवस्था सुनिश्चित की। यह निवेश आगे चलकर परिवार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बना।
बेटी की सफलता ने बदली समाज की सोच
रेणु देवी का संघर्ष तब रंग लाया, जब वर्ष 2024 में उनकी पुत्री अदिति कोमल का चयन बिहार सैन्य पुलिस में आरक्षी पद पर हुआ। इस उपलब्धि ने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी, बल्कि समाज की सोच को भी बदल दिया। जो लोग कभी बेटी को बोझ मानते थे, वही आज उसकी वर्दी देखकर सम्मान की दृष्टि से देखते हैं।
रेणु देवी बताती हैं कि बेटी की सफलता की सूचना मिलने पर वे भावुक हो गईं और खुशी के कारण कई दिनों तक नींद नहीं आई। आज गांव में उनकी पहचान एक सशक्त मां और वर्दीधारी बेटी के परिवार के रूप में होती है।
महिला सशक्तीकरण की योजनाओं की जीवंत मिसाल
रेणु देवी मानती हैं कि यह सफलता जीविका परियोजना और राज्य सरकार की महिला सशक्तीकरण नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और आरक्षण जैसी व्यवस्थाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
रेणु देवी की यह यात्रा यह साबित करती है कि जब महिलाओं को अवसर, सहयोग और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज की दिशा बदल सकती हैं। यह कहानी बेटियों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव की जीवंत मिसाल है।
