15 जनवरी को मकर संक्रांति, गंगा स्नान से खुलेगा पुण्य का द्वार; राशि के अनुसार करें दान
इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान कर ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, छपरा। मकर संक्रांति का पावन पर्व इस वर्ष 15 जनवरी, गुरुवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु गंगा सहित पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य, जप और पूजा-पाठ करेंगे। मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। धर्मशास्त्रों में इस पर्व को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
क्या है मकर संक्रांति का महत्व?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य एक राशि का भोग पूर्ण कर दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो उसे संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तभी मकर संक्रांति होती है। इसी दिन से सूर्य की गति दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर हो जाती है। इसके साथ ही दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।
15 जनवरी को ही होगा पुण्यकाल:
पंडित अनित शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष सूर्य 14 जनवरी 2026 की रात नौ बजकर 36 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। हालांकि, इसका पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। इसी कारण 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना धर्मसम्मत और फलदायी माना गया है।
गंगा स्नान और दान का विशेष फल:
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु चूड़ा, दही, चावल, उड़द, मूंग, तिल, तिलकुट, मूली, अदरक आदि का दान गरीबों और जरूरतमंदों को करते हैं। इसके साथ ही सूर्यदेव को अर्घ्य देने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
खरमास समाप्त, शुभ कार्यों की शुरुआत:
भारत मिश्र संस्कृत महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अम्बरीश कुमार मिश्र ने बताया कि मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन प्रारंभ माना जाता है। सूर्य के धनु राशि में रहने की अवधि को खरमास कहा जाता है, जिसमें सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जाता है और विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश सहित सभी शुभ कार्य पुनः आरंभ हो जाते हैं।
शनि दोष एवं सूर्य कृपा का योग:
आचार्य डॉ. योगेंद्र पांडेय ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन तिल का दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। वहीं, स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करने से सूर्यदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है। मकर संक्रांति का यह पर्व श्रद्धा, सेवा और सद्कर्म का संदेश देता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
मकर संक्रांति पर राशि अनुसार दान:
- मेष: गुड़, तिल, लाल वस्त्र, तांबे का बर्तन
- वृषभ: चावल, दूध, सफेद मिठाई, सफेद वस्त्र
- मिथुन: हरा मूंग, हरा चारा, पेन-कॉपी
- कर्क: चावल, दूध, खीर, चांदी का सिक्का
- सिंह: गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन
- कन्या: हरी सब्जियां, दाल, काला तिल
- तुला: सफेद वस्त्र, तिल, इत्र व सुगंधित वस्तुएं
- वृश्चिक: काले तिल, सरसों का तेल, गुड़
- धनु: पीली दाल, केला, हल्दी
- मकर: काले तिल, कंबल, ऊनी वस्त्र
- कुंभ: काले तिल, लोहे की वस्तुएं
- मीन: पीले वस्त्र, चने की दाल, तिल
