जागरण संवाददाता, छपरा: स्कूल एवं अपने मोहल्ले में रहने वाले दिव्यांग छात्र - छात्राओं एवं व्यक्ति से अच्छा व्यवहार करना चाहिए। स्कूल में साथ पढ़ने वाले छात्र- छात्राओं से दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। उक्त बातें सेंटर लाइन कैटालाइजिग चेंज नई दिल्ली एवं राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तरंग आनलाइन किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम के तहत रिर्सोस पर्सन ने कही।

वर्चुअल परिचर्चा में किशोर -किशोरियों को दिव्यांगों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, उसके संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। राज्य समन्वयक संदीप कुमार ओझा, ने बताया कि दिव्यांग व्यक्ति को मदद करते वक्त यह ध्यान रहना चाहिए कि यदि आप उसकी मदद कर रहे हैं तो उसे यह नहीं लगना चाहिए कि उसकी लाचारी के कारण उसकी मदद कर रहे हैं, बल्कि उसमें मानवता होना चाहिए। अल्पन कुमार सिन्हा ने कहा कि स्कूल में कोई दिव्यांग छात्र है, तो उसे किसी उपनाम से नहीं बुलाना चाहिए। उससे हर समय सकारात्मक बातें करनी चाहिए। जैसे, तुम यह कर सकते हो। पढ़ाई के समय भी उसका हौसला बढ़ाना चाहिए। संजय कुमार सिंह ने कहा कि आपके पड़ोसी हो, आपके घर में कोई हो या और भी कहीं कोई भी दिव्यांग व्यक्ति हो तो उसकी हर संभव मदद करनी चाहिए और उसके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। वर्चुअल परिचर्चा का संचालन रवीना कुमारी एवं सत्र का समापन मास्टर ट्रेनर सुनील कुमार ने किया। वर्चुअल वेबीनार में मास्टर ट्रेनर डा. अंसार आलम समेत छात्र करण कुमार, ममता कुमारी, करिश्मा कुमारी, आर्य, प्रशांत कुमार, अमित कुमार समेत अन्य विद्यार्थियों ने भाग लिया। ------------------

- किशोरावस्था की वर्चुअल परिचर्चा में शामिल हुए शिक्षक व छात्र-छात्राएं

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