जीविका से जुड़ीं, 50 हजार का लोन लिया और बदल ली अपनी जिंदगी; सारण की आनंदी के अचार का यूपी तक जलवा
सारण की आनंदी देवी ने जीविका के सहयोग से अपनी छोटी गुमटी को सफल अचार व्यवसाय में बदला, जिसकी मासिक ...और पढ़ें

अचार दिखातीं आनंदी देवी। जागरण
HighLights
जीविका के सहयोग से ₹2000 की आय ₹65000 हुई।
आनंदी देवी के अचार का स्वाद यूपी तक पहुँचा।
10-12 ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार।
अमृतेश, छपरा। सारण के सवरी की गलियों में कभी जिस छोटी-सी गुमटी से महीने में दो हजार रुपये की आमदनी होती थी, आज वहीं से निकले अचार का स्वाद उत्तर प्रदेश के बलिया और देवरिया तक पहुंच रहा है।
यह कहानी है जलालपुर की आनंदी देवी की, जिन्होंने जीविका के सहयोग और अपनी मेहनत से छोटे से जनरल स्टोर को सफल कारोबार में बदल दिया। आज वह अपने उद्यम से हर महीने 60 से 65 हजार रुपये कमा रही हैं और दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।
गुमटी से शुरू हुआ उद्यम का सफर
सारण के जलालपुर प्रखंड की सवरी पंचायत निवासी 10वीं तक शिक्षित आनंदी देवी 18 अगस्त 2017 को तारा जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। उस समय वह एक छोटी-सी गुमटी में जनरल स्टोर चलाती थीं।
दुकान से उन्हें प्रतिमाह करीब दो हजार रुपये की आमदनी होती थी। जीविका से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने के अवसरों की जानकारी मिली।
उन्होंने 50 हजार रुपये का ऋण लेकर दुकान का विस्तार किया। कारोबार बढ़ा तो 30 हजार रुपये का दोबारा ऋण लेकर उद्यम को और आगे बढ़ाया। दोनों ऋणों का समय पर भुगतान कर उन्होंने आर्थिक अनुशासन की मिसाल भी पेश की।

अचार ने कारोबार को दी नई पहचान
आनंदी देवी ने कारोबार को सिर्फ जनरल स्टोर तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने आम, आंवला, लहसुन, कटहल और मशरूम समेत विभिन्न प्रकार के अचार बनाना शुरू किया।
इसके साथ भूजा, बेसन और सत्तू का निर्माण व व्यवसाय भी शुरू किया। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और लगातार मेहनत से उनके उत्पादों की मांग स्थानीय बाजार में बढ़ती गई। धीरे-धीरे उनके उत्पादों ने सारण की सीमा पार की और उत्तर प्रदेश के बलिया व देवरिया के बाजारों तक पहुंच बना ली।
मेले बने बाजार विस्तार की सीढ़ी
आनंदी के कारोबार को बड़े बाजार तक पहुंचाने में जीविका की ओर से मिले विपणन अवसरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पटना सरस मेला, सोनपुर मेला समेत विभिन्न बड़े आयोजनों में उन्हें अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और बेचने का अवसर मिला।
यहां उन्हें सीधे ग्राहकों से जुड़ने के साथ नए कारोबारी संपर्क बनाने का भी मौका मिला। पटना सरस मेला और सोनपुर मेला में वह कई बार करीब तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक का कारोबार कर लेती हैं। मेलों में मिले ग्राहकों और संपर्कों ने उनके नियमित बाजार का दायरा भी बढ़ाया।
खुद आत्मनिर्भर बनीं, दूसरों को भी दिया रोजगार
आज आनंदी देवी अपने अलग-अलग उद्यमों से हर महीने करीब 60 से 65 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। कारोबार में मांग बढ़ने पर वह 10 से 12 महिलाओं को काम भी उपलब्ध कराती हैं।
यानी जिस सफर की शुरुआत महज दो हजार रुपये की मासिक आमदनी से हुई थी, वह अब खुद के साथ दूसरी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने तक पहुंच चुका है।
आनंदी देवी की सफलता इस बात की मिसाल है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि वित्तीय सहयोग, प्रशिक्षण, बाजार और सही मार्गदर्शन मिले तो छोटी-सी शुरुआत भी बड़े उद्यम का रूप ले सकती है। जीविका से मिली मदद और अपनी मेहनत के दम पर आनंदी अब लखपति बन चुकी हैं।
