सारण का ऐतिहासिक शिवधाम: 360 साल पुराने गोपालेश्वरनाथ मंदिर की है अनोखी मान्यता
सारण के एकमा प्रखंड स्थित 360 साल पुराना गोपालेश्वरनाथ मंदिर एक प्रमुख शिवधाम है, जहां सावन में दूर-दराज से श्रद्धालु ...और पढ़ें

एकमा प्रखंड स्थित गोपालेश्वरनाथ मंदिर। जागरण
HighLights
सारण का 360 साल पुराना ऐतिहासिक गोपालेश्वरनाथ शिव मंदिर।
हाल ही में 33 लाख रुपये से भव्य जीर्णोद्धार किया गया।
सावन में भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता।
सारण के एकमा प्रखंड के बिशुनपुरा स्थित ऐतिहासिक गोपालेश्वरनाथ मंदिर क्षेत्र के प्रमुख शिवधामों में शामिल है। सावन के महीने में यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं।
आसपास के जिलों के साथ उत्तर प्रदेश के दोआबा क्षेत्र में भी इस मंदिर की धार्मिक पहचान है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा गोपालेश्वरनाथ से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है।
मंदिर का इतिहास
स्थानीय मान्यता के अनुसार, गोपालेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना मार्च 1667 में हुई थी। करीब 360 वर्ष पुराने इस मंदिर की स्थापना गोपालेश्वरनाथ पांडेय के नाम से जुड़ी बताई जाती है। वह खूटकणवा गांव के राजपरिवार से संबंधित थे।
लंबे समय तक देखरेख के अभाव में मंदिर जर्जर हो गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के सहयोग से वर्ष 2024 में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया।
करीब 33 लाख रुपये की लागत से मंदिर को नया और भव्य स्वरूप दिया गया। मंदिर निर्माण के लिए बिशुनपुरा के साथ पूरे प्रखंड और विभिन्न पंचायतों से चंदा जुटाया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष देव कुमार सिंह के परिवार ने भी निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग किया।
मंदिर की विशेषता
मंदिर में स्थापित शिवलिंग और नंदी की विशेष धार्मिक मान्यता है। सावन की सोमवारी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
शुक्रवार और शनिवार को भी मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है। जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है, वे मंदिर में अष्टयाम कराते हैं। हाल ही में खूटकणवा-बिशुनपुरा निवासी रामबाबू पांडेय और उनकी पत्नी ने मनोकामना पूर्ण होने पर मंदिर में अष्टयाम कराया।
मंदिर जाने का रास्ता
गोपालेश्वरनाथ मंदिर एकमा प्रखंड के बिशुनपुरा गांव में स्थित है। एकमा बाजार से बिशुनपुरा की ओर जाने वाले स्थानीय मार्ग से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
एकमा क्षेत्र में पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों से बिशुनपुरा स्थित गोपालेश्वरनाथ मंदिर के बारे में जानकारी लेकर आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है।
सावन और सोमवारी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्थानीय स्तर पर आवागमन की व्यवस्था की जाती है।
सावन में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। दूर-दराज से आने वाले भक्त बाबा का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं। लोगों में बाबा के प्रति गहरी आस्था है। मनोकामना पूर्ण होने के बाद भक्त दोबारा मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना और अष्टयाम कराते हैं।
विवेकानंद मिश्रा, मंदिर के पुजारी
जब वह पहली बार मंदिर पहुंचे थे, तब मंदिर की स्थिति खंडहर जैसी थी। उसी समय उन्होंने जनसहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार कराने का संकल्प लिया। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के सहयोग से करीब 33 लाख रुपये खर्च कर मंदिर को भव्य स्वरूप दिया गया। एक बार गोपालेश्वरनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद लेंं।
देव कुमार सिंह, अध्यक्ष, मंदिर समिति

