समस्तीपुर । एक प्रचलित कंपनी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह की एक महिला समेत दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामले में नालंदा जिला के ब्रंडी कतरीसराय निवासी विनोद सिंह के पुत्र राजू कुमार सिंह ने खानपुर थाना क्षेत्र की एक महिला के साथ हिमाचल प्रदेश में डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर एक व्यक्ति को गुमराह किया। पीड़ित से ऑनलाइन 25 लाख रुपये खाता पर ट्रांजेक्शन कराकर ठगी का शिकार बनाया। आरोपित के विरुद्ध हिमाचल प्रदेश में शिकायत दर्ज है। गत दस दिनों से काफी मशक्कत के बाद मुफस्सिल थाना पुलिस और डीआइयू के सहयोग से हिमाचल पुलिस ने दोनों आरोपित को दबोच लिया। उसके पास से पांच मोबाइल, छह सिम और सात आधार कार्ड भी बरामद किए गए हैं।

शुक्रवार को मुफस्सिल थाना परिसर में प्रेसवार्ता कर सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी प्रीतिश कुमार ने मामले का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि आरोपित एक संगठित गिरोह के सदस्य हैं। देश में प्रचलित कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर विभिन्न प्रदेशों में ऑनलाइन संपर्क स्थापित कर लोगों को गुमराह करते थे। हिमाचल प्रदेश के हरौली थाना अंतर्गत एक व्यक्ति से प्रचलित कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बनाने के नाम पर धोखा देकर 25 लाख 15 हजार रुपये ऑनलाइन खाते पर ट्रांजेक्शन करा लिया। गत 20 जुलाई 2019 को पीड़ित नरेश कुमार ने हिमाचल प्रदेश के उना जिला अंतर्गत हरौली थाना में आरोपित के विरुद्ध एक प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने तकनीक के माध्यम से आरोपित का पता लगाया। इसके बाद मुफस्सिल थानाध्यक्ष विक्रम आचार्या के नेतृत्व में डीआइयू और हिमाचल पुलिस ने तकनीक एवं सर्विलांस के माध्यम से मुख्य साजिशकर्ता नालंदा के राजू कुमार समेत दो अरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। डीएसपी ने बताया कि दोनों आरोपित समस्तीपुर में एक किराए का मकान लेकर रह रहे थे। पुलिस से बचने के लिए लगातार लोकेशन बदल रहे थे। गिरफ्तार आरोपित को हिमाचल पुलिस को सौंप दिया गया है। न्यायालय में प्रस्तुत कर ट्रांजिट रिमांड पर हिमाचल प्रदेश लेकर जाएगी। छापेमारी दल में मुफस्सिल थानाध्यक्ष विक्रम आचार्या, हिमाचल प्रदेश पुलिस, डीआइयू समेत सशस्त्र बल के जवान मौजूद रहे। महिला सहयोगी को भी बनाया था ठगी का शिकार

समाचार पत्र व सोशल मीडिया पर विज्ञापन के माध्यम से गलत सिम का प्रयोग कर लोगों से संपर्क स्थापित किया जाता था। इस दौरान एक ही सिम को पोर्ट कर कई बार प्रयोग किया जाता था। इसके बाद लोगों से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर खाते से रुपये की निकासी करा ली जाती थी। गिरफ्तार मुख्य साजिशकर्ता नालंदा के राजू ने अपनी महिला सहयोगी को भी ठगी का शिकार बनाया था। उसे नौकरी का झांसा देकर बैंक अकाउंट खुलवाया। इसके बाद एटीएम कार्ड लेकर उसे गुमराह कर रहा था। उसी के बैंक अकाउंट पर लोगों को झांसा देकर ऑनलाइन रुपये का ट्रांजेक्शन कराया जाता था। आरोपित के पास से अलग अलग प्रदेशों में बने कई आधारकार्ड भी बरामद हुए हैं। इसमें एक ही तस्वीर पर अलग-अलग नाम पर पता अंकित है।

Posted By: Jagran

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